

ईटानगर: असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा से जुड़े विवाद और हालिया तनाव के बीच अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले में गालो समुदाय के विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हिमे, गेर्मे और आसपास के गांवों का दौरा किया। कानून, सामाजिक न्याय एवं जनजातीय मामलों के मंत्री केंटो जिनी के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय ग्रामीणों और समुदाय के वरिष्ठ लोगों से मुलाकात कर जमीनी स्थिति की जानकारी ली। टीम ने सभी पक्षों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की। प्रतिनिधिमंडल में मंत्री केंटो जिनी के अलावा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर कार्दो न्यिग्योर, विधायक पेसी जिलेन और तोजिर काडू शामिल थे। इनके साथ गालो यूथ ऑर्गनाइजेशन (GYO), लोअर सियांग स्टूडेंट्स यूनियन, गालो वेलफेयर सोसाइटी की जिला इकाई, जिला प्रशासन और पुलिस के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने बताई सीमा और जमीन से जुड़ी चिंताएं
दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय लोगों से सीधे बातचीत की। ग्रामीणों ने सीमा और जमीन से जुड़े विवाद को लेकर अपनी चिंताओं और आशंकाओं से जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने लोगों की समस्याओं को सुना और मौजूदा स्थिति को समझने का प्रयास किया। यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब 10 अगस्त को हिमे-बोदोटी क्षेत्र में हुई झड़प के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया था। घटना में कई लोगों के घायल होने के बाद सीमा और भूमि से जुड़े पुराने विवाद को लेकर भी चिंता गहरा गई थी। हालांकि, घटना की प्रकृति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। असम के छात्र संगठन टीएमपीके ने बाद में दावा किया था कि 10 अगस्त की घटना व्यापक अंतरराज्यीय सीमा विवाद से संबंधित नहीं, बल्कि एक भूखंड के स्वामित्व को लेकर दो समूहों के बीच हुए विवाद का परिणाम थी।
‘संवाद और संयम से ही निकलेगा समाधान’
मंत्री केंटो जिनी ने ग्रामीणों से बातचीत के दौरान कहा कि मामला बेहद संवेदनशील है और इसे अत्यंत सावधानी के साथ संभालने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संवाद, संयम और आपसी समझ के माध्यम से ही स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने सभी हितधारकों के साथ लगातार बातचीत की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी नए तनाव को रोकने के लिए सरकार, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदायों के बीच संपर्क बना रहना जरूरी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार स्थानीय लोगों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण समाधान तलाशने के लिए काम करेगी।
तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों से बचने की अपील
प्रतिनिधिमंडल ने सभी समुदायों और संगठनों से ऐसी किसी भी गतिविधि से दूर रहने की अपील की, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है या क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि स्थानीय लोगों का व्यापक हित और विभिन्न समुदायों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने स्थानीय समुदायों, नागरिक संगठनों, जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर विवादों को लोकतांत्रिक एवं संवाद आधारित तरीके से सुलझाने की प्रतिबद्धता जताई। हिमे की घटना के बाद पांच संगठनों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू से मुलाकात कर घटना की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की थी। प्रतिनिधिमंडल ने असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के स्थायी समाधान की मांग भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी थी। उस दौरान भी संगठनों ने शांति, अहिंसा और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने पर जोर दिया था। सभी समुदायों से तनाव बढ़ाने वाले बयानों और गतिविधियों से बचने की अपील की गई थी।
कांगकू सर्किल में दशकों पुराना विवाद
लोअर सियांग के कांगकू सर्किल में सीमा से जुड़े विवाद का इतिहास काफी पुराना है। हालांकि, हाल के वर्षों में दोनों राज्यों के बीच बातचीत के माध्यम से कई विवादित हिस्सों के समाधान की दिशा में प्रगति हुई है। दिसंबर 2025 में अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के डिप्टी स्पीकर कार्दो न्यिग्योर ने कहा था कि लोअर सियांग के संवेदनशील कांगकू सर्किल में करीब 80 प्रतिशत विवादित मुद्दों का समाधान हो चुका है और बाकी मामलों को भी बातचीत के जरिए सुलझाने के प्रयास जारी हैं। गालो विधायकों के इस दौरे को प्रभावित गांवों के लोगों से सीधे संवाद स्थापित करने और क्षेत्र की वास्तविक स्थिति समझने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने हिमे-बोदोटी मामले के शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि असम-अरुणाचल सीमा से जुड़े विवादों का समाधान टकराव के जरिए नहीं, बल्कि बातचीत, आपसी समझ और शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए।