नेपाल में बाढ़ से मृतकों की संख्या 939 हुई, 4,247 लोग लापता

26 अगस्त को उत्तरी और मध्य नेपाल के शहरों तथा गांवों में मची थी भारी तबाही
Death toll from floods in Nepal rises to 939; 4,247 people missing
विलाप करती महिला
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काठमांडू : नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या सोमवार को बढ़कर 939 हो गई, जबकि 4,247 लोग अब भी लापता हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, अब तक चितवन से 272, नवलपरासी पूर्व से 207, नवलपरासी पश्चिम से 151 और गोरखा जिलों से 62 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह नुवाकोट से 95, धादिंग से 55, तनहूं से 37 और रसुवा से 24 शव बरामद हुए हैं। आपदा प्राधिकरण ने बताया कि लापता लोगों में 99 सुरक्षाकर्मी और 591 विदेशी नागरिक शामिल हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के ढहने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आ गई। इसने 26 अगस्त को उत्तरी और मध्य नेपाल के शहरों तथा गांवों में भारी तबाही मचाई। चीनी मीडिया की खबरों के अनुसार, इस आपदा में चीन की ओर भी 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में करीब 550 लोग अब भी लापता हैं। नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय ने कहा कि जिन पीड़ितों की पहचान नहीं हो सकी उन्हें ‘‘मानक और स्वीकृत प्रोटोकॉल’’ के तहत दफना दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि डीएनए विश्लेषण में विशेषज्ञता रखने वाले भारत के 18 सदस्यीय फॉरेंसिक विशेषज्ञों का एक दल नेपाल पहुंच गया है और दोनों देशों के बीच समन्वय जारी है।

लापता लोगों के परिजनों से DNA सैंपल मांगे गए

नेपाल में लापता लोगों की पहचान के लिए उनके परिजनों से DNA सैंपल मांगे गए हैं। पुलिस ने माता-पिता और बच्चों से DNA देने के साथ लापता व्यक्ति की आखिरी बार देखे जाने की जगह और समय की जानकारी देने को कहा है। नेपाल के बाहर रहने वाले ऐसे लोग, जिनके रिश्तेदार नेपाल में लापता हैं, उन्हें अपने देश में DNA प्रोफाइलिंग कराकर रिपोर्ट ईमेल से नेपाल पुलिस को भेजने को कहा गया है।

10 सेकंड का समय बचा सकता है जान

26 अगस्त को सुबह करीब 8:45 बजे नेपाल के रसुवा सीमा शुल्क कार्यालय में सीमा शुल्क एवं सूचना अधिकारी करबीर गैरे को अचानक भूकंप जैसा महसूस हुआ। वह बाहर निकले और धूल के गुबार के साथ आती एक विशाल बाढ़ को देखा। वह चीख उठे, ‘‘बाढ़ आ रही है, भागो!’’ गैरे और अन्य लोग तुरंत ऊंचाई की ओर भागे। करीब 10 सेकंड बाद कीचड़ भरा पानी उनके आसपास की संरचनाओं को बहा ले गया। गैरे ने बताया कि वे 10 सेकंड निर्णायक साबित हुए। खतरे को भांपकर ऊंचाई की ओर भागने वाले लोग बच गए, जबकि देरी करने या दूसरी दिशा में भागने वाले लोग बाढ़ की चपेट में आ गए या लापता हो गए। उनका अनुभव एक अहम बात को रेखांकित करता है--चेतावनी तभी जान बचा सकती है, जब वह लोगों को तत्काल कार्रवाई के लिए प्रेरित करे।

चीन ने नेपाल को डेटा न देने के आरोप को खारिज किया

चीन ने नेपाल के उन आरोपों को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि चीन ने ग्लेशियरों की गतिविधियों और पानी के स्तर से जुड़े डेटा नहीं दिए। चीन ने कहा कि उसने नेपाल के साथ जरूरी जानकारी समय पर साझा की है। रॉयटर्स के मुताबिक, नेपाल और चीन के अधिकारियों ने 27 मई को काठमांडू में बैठक की थी। इसमें बाढ़, मौसम और ग्लेशियर से जुड़े खतरों पर चर्चा हुई थी। चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक जानकारी खुले और पारदर्शी तरीके से जारी की गई थी। चीन के वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल सेंटर ने 26 अगस्त की आपदा से 12 दिन पहले नेपाल को भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसे खतरों की चेतावनी भी ईमेल से भेजी थी।

सुरंगों में फंसे लोगों का रेस्क्यू जारी

नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। त्रिशूली-3A समेत कई प्रोजेक्ट्स की सुरंगों के मुहाने पर जमा मलबा और कीचड़ हटाकर अंदर पहुंचने की कोशिश की जा रही है। रेस्क्यू टीमों में नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ भारत और चीन के विशेषज्ञ भी शामिल हैं। टीमें सुरंगों के अंदर मौजूद लोगों से संपर्क करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। बाढ़ के बाद सुरंगों के रास्ते मलबे से बंद हो गए हैं। ऐसे में भारी मशीनों और दूसरे उपकरणों की मदद से रास्ता खोलने का काम किया जा रहा है।

बचाव उपकरणों की कमी से तलाश अभियान में आ रही बाधा

बाढ़ के बाद बचाव कार्य और शवों को निकालने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले सुरक्षाकर्मियों को विशेष उपकरणों, ‘बॉडी बैग’, रस्सियों और हेलीकॉप्टर की कमी के कारण कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक उपकरणों की कमी के कारण दुर्गम इलाकों में अभियान चलाना काफी कठिन हो रहा है। जिन उपकरणों की कमी है, उनमें थर्मल कैमरे, आवाज के जरिये जीवित लोगों का पता लगाने, पत्थरों को काटने के लिए खास उपकरण, शवों को रखने के लिए थैले, रस्सियां और अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर शामिल हैं।

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