

गुवाहाटी : कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है और उसे शुरुआती स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोमवार को कहा कि संगठन क्षेत्र के छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा और उनकी चिंताओं को सामने रखने के लिए एक मंच उपलब्ध कराएगा। रांका ने कहा कि कॉजपा पूर्वोत्तर के सभी राज्यों तक पहुंच बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा, “पूर्वोत्तर हमारे लिए महत्वपूर्ण है और अब तक हमें अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।” उनका यह बयान असम पुलिस द्वारा गुवाहाटी में स्वयंसेवकों की बैठक से पहले उन्हें और संगठन के 40 से अधिक अन्य सदस्यों को करीब 10 घंटे तक हिरासत में रखे जाने के एक दिन बाद आया।
युवा और छात्रों के मुद्दों पर फोकस
रांका ने कहा कि पूर्वोत्तर के लोग ऐसे मंच की तलाश कर रहे हैं, जो छात्रों और युवाओं से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाए। उन्होंने कहा कि कॉजपा इस वर्ग को अपनी चिंताओं और समस्याओं को सामने रखने का अवसर देगी। संगठन पहले भी शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अभियान चलाता रहा है।
सीईसी के इस्तीफे की मांग पर कायम
रांका ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि संगठन इस मुद्दे से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने मतदाता सूचियों से कथित तौर पर 13 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा करते हुए कुमार से प्रेस और जनता के सामने इन आरोपों पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। रांका ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से नाम हटाकर 13 करोड़ लोगों के साथ “धोखाधड़ी” की गई है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इन आरोपों के बीच भाजपा द्वारा निर्वाचन आयोग का “बचाव” क्यों किया जा रहा है। ये आरोप कॉजपा की ओर से लगाए गए हैं; स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। हाल में सीजेपी ने भी एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
2 अक्टूबर से देशव्यापी प्रदर्शन
रांका ने कहा कि सीईसी को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका दिया गया था, लेकिन अब संगठन देशव्यापी आंदोलन की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा, “48 घंटे तक गेंद कुमार के पाले में थी, अब यह कॉजपा के पाले में है।” उन्होंने घोषणा की कि कॉजपा दो अक्टूबर से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने की बात कही। हालिया बयानों में भी संगठन ने 2 अक्टूबर से विरोध शुरू करने की चेतावनी दी है। रांका ने कहा कि कॉजपा किसी मुद्दे को उठाने के बाद उसे तब तक नहीं छोड़ती, जब तक संगठन के अनुसार उसे अपने अभियान में सफलता नहीं मिलती। पूर्वोत्तर में संगठन के विस्तार की कोशिश के साथ ही आने वाले दिनों में छात्रों, युवाओं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर उसकी गतिविधियां बढ़ने के संकेत हैं।