नयी दिल्ली घोषणापत्र भारत के दूरदर्शी नेतृत्व का प्रमाण : शर्मा

नयी दिल्ली घोषणापत्र भारत के दूरदर्शी नेतृत्व का प्रमाण : शर्मा
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गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में स्वीकार किए गए नयी दिल्ली घोषणापत्र की सराहना करते हुए इसे बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारतीय विदेश नीति के ‘‘व्यावहारिक, समावेशी और दूरदर्शी नेतृत्व’’ का उदाहरण बताया है। उन्होंने घोषणापत्र को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की सफलता का सशक्त प्रमाण करार दिया। नयी दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान स्वीकार किए गए 45 पृष्ठ के घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों की मादक पदार्थ रोधी एजेंसियों के प्रमुखों द्वारा जुलाई में गुवाहाटी में जारी घोषणापत्र का भी स्वागत किया गया है। इसमें कहा गया है कि गुवाहाटी घोषणापत्र से सदस्य देशों की मादक पदार्थ रोधी एजेंसियों के बीच अभियानगत और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

मोदी के नेतृत्व की सराहना

मुख्यमंत्री शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उनकी अध्यक्षता में इस ऐतिहासिक दस्तावेज को सफलतापूर्वक स्वीकार किया गया। उन्होंने कहा कि नयी दिल्ली घोषणापत्र विषयवस्तु के लिहाज से ठोस और दृष्टिकोण की दृष्टि से दूरगामी है। शर्मा के मुताबिक, घोषणापत्र भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की सफलता का मजबूत प्रमाण है और यह वैश्विक स्तर पर भारत की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है। 

कई अहम मुद्दों पर बनी सहमति

मुख्यमंत्री ने कहा कि घोषणापत्र में बहुपक्षीय सुधार, आतंकवाद से मुकाबला, नयी प्रौद्योगिकी, कृषि और पशु संरक्षण जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। उनके अनुसार, इन मुद्दों पर वैश्विक शक्तियों के बीच सहमति बनना बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। उन्होंने यह भी कहा कि घोषणापत्र में ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को प्रमुखता दी गई है। ग्लोबल साउथ में मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका के विकासशील, अल्प विकसित तथा अविकसित देशों को शामिल किया जाता है।

गुवाहाटी घोषणापत्र को मिली औपचारिक मान्यता

शर्मा ने नयी दिल्ली घोषणापत्र में गुवाहाटी का उल्लेख किए जाने को असम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स घोषणापत्र ने ब्रिक्स देशों की मादक पदार्थ रोधी एजेंसियों के प्रमुखों द्वारा स्वीकार किए गए गुवाहाटी घोषणापत्र को मादक पदार्थों के खिलाफ अभियानगत और तकनीकी सहयोग मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में औपचारिक मान्यता दी है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उल्लेख ‘‘अत्यंत प्रतीकात्मक और महत्वपूर्ण’’ है, क्योंकि असम मादक पदार्थों की तस्करी के एक महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है।

सूचना साझा करने पर जोर

जुलाई में गुवाहाटी में स्वीकार किए गए घोषणापत्र में सदस्य देशों के बीच राष्ट्रीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप सूचना, खुफिया जानकारी और सर्वोत्तम तौर-तरीकों को समय पर साझा करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। इसके अलावा मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कानून प्रवर्तन और नियामकीय प्रयासों को मजबूत करने के लिए नवीन प्रौद्योगिकियों, डिजिटल माध्यमों और आंकड़ों पर आधारित तरीकों को बढ़ावा देने की बात कही गई थी।

गुवाहाटी में हुई थी ब्रिक्स की अहम बैठक

भारत की वर्ष 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता का मुख्य विषय ‘लचीलेपन, नवोन्मेष, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ है। इसी क्रम में छह और सात जुलाई को गुवाहाटी में ब्रिक्स देशों की मादक पदार्थ रोधी एजेंसियों के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक हुई थी। इस बैठक में ब्राजील, चीन, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। बैठक के दौरान मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग, सूचना साझा करने और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया था। नयी दिल्ली घोषणापत्र में गुवाहाटी घोषणापत्र का उल्लेख असम की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थ विरोधी सहयोग के संदर्भ में रेखांकित करता है।

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