भूपेन हजारिका के संगीत ने असमिया संस्कृति को विश्व स्तर तक पहुंचाया : अमित शाह

जन्मशती पर केंद्रीय गृह मंत्री ने ‘ब्रह्मपुत्र के कवि’ को दी श्रद्धांजलि कहा- उनकी अमर विरासत राष्ट्र निर्माण के संकल्प को प्रेरित करती रहेगी
श्रद्धांजलि
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गुवाहाटी : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को महान गायक, संगीतकार और सांस्कृतिक व्यक्तित्व भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके संगीत ने असम की समृद्ध और विविध संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। शाह ने कहा कि हजारिका के गीत उस जीवन-मूल्य और विचारधारा को प्रतिबिंबित करते थे, जिसने सदियों से समाज को एकजुट रखने का काम किया है। शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि वह ‘ब्रह्मपुत्र के कवि’ और भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि भूपेन दा के संगीत ने असमिया संस्कृति की विविधता को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।

असम की संस्कृति को मिली वैश्विक पहचान

अमित शाह ने कहा कि भूपेन हजारिका का संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि उसमें असम और पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं की गहरी अभिव्यक्ति दिखाई देती थी। उन्होंने कहा कि हजारिका के गीत उस जीवन-दर्शन को सामने रखते थे, जिसने लंबे समय से समाज को जोड़कर रखा है। शाह ने कहा कि उनकी अमर विरासत भारत के राष्ट्र निर्माण के संकल्प को आने वाली पीढ़ियों तक प्रेरित करती रहेगी। हजारिका ने असमिया लोक संगीत और भारतीय संगीत की विभिन्न परंपराओं को आधुनिक मंच से जोड़ते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी रचनाओं में असम की प्रकृति, ब्रह्मपुत्र, आम लोगों का जीवन, सामाजिक समानता, मानवीय संवेदना और एकता जैसे विषय प्रमुख रहे।

आवाज में थी मानवीय संवेदना

भूपेन हजारिका को असम में प्यार से ‘सुधाकंठ’ कहा जाता है। उनकी गहरी और प्रभावशाली आवाज ने असमिया संगीत को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने असमिया के अलावा हिंदी और बंगाली सहित कई भाषाओं में भी काम किया। उनके संगीत में क्षेत्रीय संस्कृति के साथ-साथ व्यापक मानवीय सरोकारों की झलक मिलती थी। यही कारण है कि उनकी रचनाएं असम की सीमाओं से बाहर निकलकर देश के अलग-अलग हिस्सों में लोकप्रिय हुईं और उनकी सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। अमित शाह के संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री का आभार जताया। शर्मा ने कहा कि अमित शाह ने भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती पर ‘सुधाकंठ’ को हृदय से श्रद्धांजलि दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूपेन दा का संगीत सीमाओं से परे जाकर असम की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को विश्व स्तर तक ले गया। उन्होंने कहा कि हजारिका का एकता और मानवता का कालजयी संदेश आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। शर्मा ने कहा, ‘‘गृह मंत्री जी, इस विशेष अवसर पर भूपेन दा को याद करने के लिए आपका धन्यवाद।’’

देशभर में मनाई जा रही जन्मशती

भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती के अवसर पर असम समेत देश के विभिन्न हिस्सों में वर्षभर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मंगलवार को असम में भी उनकी जन्मशती पर व्यापक श्रद्धांजलि कार्यक्रम हुए। गुवाहाटी स्थित भूपेन हजारिका समन्वय तीर्थ में भी लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंगलवार को भूपेन हजारिका को उनकी जन्मशती पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी आवाज असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना को पूरे देश तक लेकर गई। मोदी ने यह भी कहा कि हजारिका के गीतों ने लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम किया। भूपेन हजारिका की विरासत को केवल संगीत तक सीमित नहीं किया जा सकता। वह ऐसे कलाकार थे जिन्होंने संगीत, कविता, गीत, फिल्म और सामाजिक चेतना के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत की आवाज को व्यापक राष्ट्रीय मंच दिया। अमित शाह का संदेश इसी व्यापक योगदान को रेखांकित करता है। हजारिका की रचनाओं में स्थानीय संस्कृति और सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों का ऐसा मेल दिखाई देता है, जिसने उन्हें असम से निकलकर पूरे भारत का सांस्कृतिक व्यक्तित्व बना दिया। भारत रत्न से सम्मानित हजारिका का संगीत आज भी असमिया समाज की सांस्कृतिक स्मृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनकी जन्मशती के अवसर पर देशभर में हो रहे आयोजन उनकी इसी कालजयी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं।

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