

काठमांडू : हिमालयी क्षेत्र में भीषण भूस्खलन और बाढ़ से कम से कम 93 हजार लोग प्रभावित हुए हैं और उन्हें तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिले तथा चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र का ग्यिरोंग काउंटी शामिल है। लगातार कई सप्ताह तक हुई भारी मानसूनी बारिश से पहाड़ी इलाकों की मिट्टी कमजोर हो गई थी। इसके बाद ऊंचाई वाले क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने और बड़े पैमाने पर भूस्खलन होने से ल्हेंडे नदी का रास्ता अवरुद्ध हो गया। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज के नेपाल प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख डेविड फिशर ने जिनेवा में पत्रकारों से कहा कि अनुमान के मुताबिक कम से कम 93 हजार लोग प्रभावित हुए हैं और उन्हें भारी सहायता की जरूरत है। रेड क्रॉस ने प्रभावित इलाकों में आपातकालीन दल भेजे हैं। राहतकर्मी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच अचानक हुए भूस्खलन से प्रभावित और फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। नेपाल और तिब्बत में बाढ़-भूस्खलन से अब तक 552 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बनी एक और झील फटी
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बनी एक और झील फट गई है। यह झील चोचेन नदी और पुरेपु सांगपो नदी के संगम के पास बनी थी। चीन ने इसके फटने की आशंका एक दिन पहले ही जताई थी। झील फटने के बाद पानी का स्तर बढ़ने लगा है। भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के पास के कई गांव खाली कराए गए हैं। लोगों और सुरक्षाकर्मियों को तुरंत सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा गया है। इस बीच चीन ने भी तिब्बत में राहत और बचाव अभियान रोक दिया है और लेवल-4 अलर्ट जारी किया है। दोबारा बाढ़ आने के खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
विदेशी मदद लेने से नेपाल का इनकार
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि फिलहाल देश को बाढ़ के बाद खोज एवं बचाव अभियान के लिए दूसरे देशों से सहायता की आवश्यकता नहीं है। मंत्रालय ने विदेशी नागरिकों को सहायता पहुंचाने और उनके मामलों में समन्वय के लिए आपातकालीन नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है। नेपाल सरकार का कहना है कि उसकी सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान संभालने में सक्षम हैं। भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने नेपाल को खोज एवं बचाव दल भेजने की पेशकश की थी।
नेपाल के प्रधानमंत्री और मंत्री आपदा राहत कोष में वेतन दान करेंगे
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह और उनकी कैबिनेट के सदस्य देश में अचानक आई भीषण बाढ़ के कारण 538 लोगों की मौत के बाद आपदा राहत कोष में अपना एक महीने का वेतन दान करेंगे। यह फैसला शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया। कैबिनेट ने वित्त मंत्रालय को यह भी निर्देश दिया कि वह बाढ़ से प्रभावित लोगों और कारोबारों के लिए राहत, कम ब्याज वाली वित्तीय सहायता और पुनर्वास पैकेज तैयार करे।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जताया दुख
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर राष्ट्रपति के प्रति संवेदना व्यक्त की है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, शी ने इस प्राकृतिक आपदा में लोगों की मौत पर गहरा दुख जताया। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचाने वाली बाढ़ से उत्पन्न गंभीर स्थिति की समीक्षा की गई।