

गुवाहाटी : असम में राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर हुए भीषण सड़क हादसे के एक दिन बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता देबब्रत सैकिया ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर राज्य में टोल वसूली तत्काल रोकने की मांग की है। उन्होंने टोल वसूली वाली सभी सड़कों का स्वतंत्र सुरक्षा और रखरखाव ऑडिट कराने की भी मांग की। सैकिया ने अपने पत्र में कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के सोनापुर के टेटेलिया में एनएच-27 पर मिनीबस और ट्रक की टक्कर का उल्लेख किया। इस हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। पुलिस के मुताबिक, रविवार शाम हुए हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य घायलों ने सोमवार को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। गुवाहाटी पुलिस के अतिरिक्त उपायुक्त (यातायात) सफीकुल हुसैन के अनुसार, मिनीबस गुवाहाटी की ओर जा रही थी, जबकि ट्रक विपरीत दिशा से आ रहा था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मिनीबस चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया। बस डिवाइडर पार कर दूसरी लेन में पहुंच गई और सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई। पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है कि सड़क के बीच बने एक बड़े गड्ढे में वाहन के जाने के बाद चालक का नियंत्रण बिगड़ा।
‘खराब सड़कों पर क्यों लिया जा रहा टोल?’
सैकिया ने आरोप लगाया कि सोनापुर हादसा कोई अकेली घटना नहीं है। उनके अनुसार, असम में टोल वाली अन्य सड़कों से भी गड्ढों, खराब रखरखाव और लगातार दुर्घटनाओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि जब सड़कें असुरक्षित और खराब स्थिति में हों तो वाहन मालिकों से टोल वसूला जाना सवाल खड़ा करता है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। सैकिया ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि असम में उन सड़कों पर टोल वसूली रोक दी जाए, जिनका रखरखाव ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि सड़क की मरम्मत पूरी होने और उसके वाहन चलाने योग्य होने का प्रमाण मिलने तक टोल वसूली नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि सड़क इस्तेमाल करने वाले लोगों से शुल्क लेने के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
सभी टोल प्लाजा का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग
कांग्रेस नेता ने असम में टोल वसूली के दायरे में आने वाले सभी टोल प्लाजा और संबंधित सड़कों का स्वतंत्र सुरक्षा एवं रखरखाव ऑडिट कराने की मांग की है। उन्होंने ऑडिट में सड़क की गुणवत्ता, रखरखाव, सुरक्षा मानकों और दुर्घटना संभावित स्थानों की स्थिति की विस्तृत जांच कराने का सुझाव दिया। सैकिया ने NHAI, कंसेशनर और स्वतंत्र इंजीनियरों की भूमिका की भी जांच की मांग की। उन्होंने रखरखाव में कथित खामियों, बार-बार होने वाली दुर्घटनाओं और अनुबंध संबंधी संभावित चूक की विस्तृत जांच कराने की बात कही। उनके अनुसार, जांच में यह भी तय किया जाना चाहिए कि सड़क के रखरखाव में कमी के लिए किसकी जिम्मेदारी है और नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ। सैकिया ने सोनापुर हादसे और टोल सड़कों पर हुई अन्य दुर्घटनाओं में मारे गए तथा घायल लोगों के परिवारों के लिए मुआवजे और तत्काल राहत की भी मांग की। उन्होंने सुधारात्मक कार्रवाई के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने, जिम्मेदारी निर्धारित करने और नियमों के अनुपालन की जानकारी सार्वजनिक करने का भी सुझाव दिया।
‘पूरे राज्य में सुधारात्मक कदम जरूरी’
कांग्रेस नेता ने कहा कि असम में सड़क सुरक्षा को लेकर केवल किसी एक हादसे के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा। उनके मुताबिक, सोनापुर हादसा टोल वाली सड़कों पर खराब रखरखाव और दुर्घटनाओं के बड़े पैटर्न का एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जन सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही के लिए पूरे राज्य में टोल सड़कों की स्थिति की व्यापक समीक्षा और आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए। सोनापुर हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने भी सड़क की खराब स्थिति को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने सड़क की तत्काल मरम्मत की मांग करते हुए चेतावनी दी थी कि मरम्मत होने तक सोनापुर टोल प्लाजा को बंद रखा जाए। इस तरह हादसे के बाद स्थानीय विरोध और कांग्रेस नेता की मांग ने असम में सड़क की गुणवत्ता, टोल वसूली और जवाबदेही को लेकर बहस को तेज कर दिया है।