सख्त कार्रवाई से गैंडा शिकार पर लगी रोक : सोनोवाल

विश्व गैंडा दिवस पर बोले केंद्रीय मंत्री
सख्त कार्रवाई से गैंडा शिकार पर लगी रोक : सोनोवाल
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गुवाहाटी : केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार को कहा कि वर्ष 2016 से पहले असम में एक सींग वाले गैंडों का अवैध शिकार आम बात हो गया था, लेकिन उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य की इस प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए सख्त और बिना किसी समझौते वाली कार्रवाई शुरू की गई। विश्व गैंडा दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में सोनोवाल ने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और वन विभाग के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के साहस एवं सहयोग से गैंडों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आया। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक के दौरान कई वर्षों में गैंडों के अवैध शिकार की घटनाओं का आंकड़ा शून्य रहा है। उनके बयान के अनुसार, इन प्रयासों से असम में गैंडों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। सोनोवाल ने कहा कि उनके गृह राज्य असम में दुनिया के लगभग 80 प्रतिशत एक-सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि आज गैंडों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन कुछ वर्ष पहले स्थिति ऐसी नहीं थी।

2016 से पहले शिकार बना बड़ी चुनौती

सोनोवाल के मुताबिक, 2016 से पहले गैंडों का अवैध शिकार एक गंभीर समस्या बन चुका था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद उनकी सरकार ने तय किया कि गैंडों की सुरक्षा के मामले में अब किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य की शान माने जाने वाले गैंडों की सुरक्षा के लिए व्यापक अभियान शुरू किया गया। इसमें राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ-साथ वन विभाग के अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। असम में गैंडा संरक्षण के संदर्भ में उपलब्ध आधिकारिक आंकड़े भी पिछले वर्षों में आबादी बढ़ने की तस्वीर दिखाते हैं। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, असम में गैंडों की संख्या 1999 में 1,672, 2006 में 2,006, 2009 में 2,201 और 2012 में 2,505 थी। 2018 में यह संख्या 2,652 दर्ज की गई थी।

काजीरंगा संरक्षण का प्रमुख केंद्र

सोनोवाल ने कहा कि गैंडा संरक्षण की इस कहानी के केंद्र में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान है। काजीरंगा दुनिया में एक सींग वाले गैंडों के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवासों में शामिल है। असम सरकार के अनुसार मार्च 2022 में अकेले काजीरंगा में 2,613 गैंडे दर्ज किए गए थे। उन्होंने कहा कि संरक्षण के प्रयासों के कारण आज असम में गैंडों की संख्या 4,000 से अधिक होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक राज्य आंकड़े में वर्तमान संदर्भ के लिए 3,260 का आंकड़ा दिया गया है। इसलिए आबादी के आंकड़े को वर्ष और गणना के स्रोत के साथ देखना जरूरी है।

कई वर्षों में शून्य शिकार का दावा

सोनोवाल ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में कई ऐसे वर्ष रहे जब असम में गैंडों के अवैध शिकार की घटनाएं शून्य रहीं। केंद्र सरकार के वन्यजीव संरक्षण संबंधी दस्तावेजों में भी असम में गैंडा शिकार के खिलाफ कड़े अभियान का उल्लेख है। एक सरकारी दस्तावेज के मुताबिक 2013 में 37 और 2014 में 32 गैंडे शिकारियों द्वारा मारे गए थे तथा इसके बाद संरक्षण एवं प्रवर्तन अभियान तेज किए गए।

उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय राज्य की राजनीतिक इच्छाशक्ति और वन विभाग के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को दिया तथा कहा कि संरक्षण की इस मुहिम को आगे भी जारी रखने की जरूरत है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षण की अपील

सोनोवाल ने विश्व गैंडा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए लोगों से असम की प्राकृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का संकल्प दोहराने की अपील की। उन्होंने कहा कि गैंडे केवल असम की पहचान नहीं हैं, बल्कि देश की जैव-विविधता की महत्वपूर्ण धरोहर भी हैं। हर वर्ष 22 सितंबर को विश्व गैंडा दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य गैंडों की पांच जीवित प्रजातियों के संरक्षण, उनके आवास की सुरक्षा और अवैध शिकार तथा सींग के अवैध व्यापार के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना है। वर्ष 2026 के लिए इसका संदेश ‘Keep the Five Alive’ रखा गया है।

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