

गुवाहाटी : असम में दुनिया की सबसे छोटी और दुर्लभ जंगली सुअर प्रजाति ‘पिग्मी हॉग’ के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री जयंत मल्ल बरुआ ने रविवार को बताया कि संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों के जरिए पिग्मी हॉग की संख्या बढ़कर 194 हो गई है। कुछ समय पहले इसकी संख्या केवल छह बताई गई थी। हालांकि, मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि छह से 194 तक की यह वृद्धि कितनी अवधि में हुई। पिग्मी हॉग को दुनिया की सबसे छोटी जंगली सुअर प्रजाति माना जाता है। यह एक अत्यंत दुर्लभ और लुप्तप्राय वन्यजीव है तथा वर्तमान में केवल भारत में पाया जाता है। इसके प्राकृतिक आवास मुख्य रूप से असम के घास के मैदानों से जुड़े हुए हैं। इन घास के मैदानों के संरक्षण और पुनर्बहाली को इस प्रजाति के अस्तित्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
लक्ष्य निर्धारित
मंत्री बरुआ ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2040 तक पिग्मी हॉग की आबादी बढ़ाकर 300 करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल प्रजाति की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्राकृतिक आवासों को मजबूत करने की व्यापक संरक्षण रणनीति का हिस्सा है। बरुआ ने कहा कि दीर्घकालिक लक्ष्य असम की इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके साथ ही उन घास के मैदानों को पुनर्जीवित और बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिन पर पिग्मी हॉग के अलावा कई अन्य संकटग्रस्त वन्यजीव प्रजातियां निर्भर हैं।
दशकों के प्रयास का परिणाम
मंत्री ने कहा कि पिग्मी हॉग की संख्या का छह से बढ़कर 194 तक पहुंचना यह दिखाता है कि दृढ़ संकल्प और लगातार किए गए संरक्षण प्रयासों से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाने में उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने इसे संरक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता का उदाहरण बताया। पिग्मी हॉग के संरक्षण में कैप्टिव ब्रीडिंग, प्रजनन और पुनर्वास जैसे प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस प्रजाति के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा भी संरक्षण अभियान का अहम हिस्सा है। घास के मैदानों में होने वाले बदलाव, आवास का नुकसान और अन्य पर्यावरणीय दबाव इसके अस्तित्व के लिए प्रमुख चुनौतियों में शामिल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया उल्लेखनीय संरक्षण कहानी
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने भी पिग्मी हॉग की संख्या में हुई वृद्धि को संरक्षण की उल्लेखनीय उपलब्धि बताया। बरुआ के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि छह से 194 तक पहुंचना संरक्षण, धैर्य और दशकों के समर्पित प्रयासों की उल्लेखनीय कहानी है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में प्राकृतिक आवासों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों को जारी रखकर पिग्मी हॉग की आबादी को और बढ़ाया जा सकता है। वर्ष 2040 तक 300 का लक्ष्य इस दुर्लभ प्रजाति को असम के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में और मजबूत स्थान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।