

डिब्रूगढ़ : असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने सोमवार को डिब्रूगढ़ स्थित अपने आवास पर 96 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी और वरिष्ठ शिक्षाविद् फणीधर गोगोई से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें राष्ट्र और समाज के प्रति उनके दीर्घकालिक योगदान के लिए ‘Governor Assam Varishtha Nagrik Samman’ पहल के तहत दिया गया। राज्यपाल ने गोगोई को असमिया गमछा, 51 हजार रुपये का चेक, सेलेंग सदर, धोती, छाता और फलों की टोकरी भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षक के रूप में गोगोई के योगदान की सराहना की और उनके जीवन को समर्पण, परिश्रम तथा अनुशासन का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
स्वतंत्रता आंदोलन से शिक्षा के क्षेत्र तक योगदान
फणीधर गोगोई ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं। राज्यपाल ने कहा कि उनका जीवन राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता और समाज के लिए निरंतर योगदान की मिसाल है। आचार्य ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान केवल किसी व्यक्ति का सम्मान करना नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के मूल्यों, संघर्षों और योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करना है, जिसने देश और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि समाज में वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव और योगदान का विशेष महत्व है। उनके संघर्षों और अनुभवों से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को सम्मानित करना उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। ‘Governor Assam Varishtha Nagrik Samman’ पहल के तहत राज्यपाल वरिष्ठ नागरिकों और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले बुजुर्गों से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित करते रहे हैं। राजभवन की ओर से वरिष्ठ शिक्षकों और अन्य क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोगों के सम्मान के लिए भी अलग-अलग पहल संचालित की जाती हैं।
अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना
राज्यपाल ने फणीधर गोगोई के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान आने वाली पीढ़ियों को भी सेवा और जिम्मेदारी की भावना के लिए प्रेरित करता है। गोगोई को सम्मानित किए जाने के दौरान उनके जीवन और योगदान को याद किया गया तथा उनके अनुभवों और सेवाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान और उनके योगदान के प्रति समाज में कृतज्ञता की भावना को मजबूत करना रहा।