असम कैबिनेट विस्तार: अनुभवी नेताओं पर भरोसा कायम, नए चेहरों से साधा संतुलन

कुछ पुराने मंत्रियों की छुट्टी, सहयोगी दलों को समायोजन और बराक घाटी सहित विभिन्न क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देकर भाजपा ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर नई टीम तैयार की
पुराने चेहरों के साथ ही नए को भी मिला मौका
असम मंत्रिमंडल का हुआ विस्तार
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असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को अपनी सरकार का बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार करते हुए राजनीतिक अनुभव और सामाजिक संतुलन का मिश्रण पेश किया। गुवाहाटी स्थित राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा और सहयोगी दलों के कुल 12 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इस विस्तार के साथ मुख्यमंत्री समेत मंत्रिपरिषद की कुल संख्या 17 हो गई है।

पुराने चेहरों पर फिर भरोसा तो नए चेहरों को भी मौका

नई कैबिनेट में सरकार ने एक बार फिर अपने अनुभवी नेताओं पर भरोसा कायम रखा है। अशोक सिंघल, पीयूष हजारिका, जयंत मल्लबरुआ और रणोज पेगू जैसे नेता, जो पहले भी अहम विभाग संभाल चुके हैं, उन्हें दोबारा कैबिनेट में शामिल किया गया है। इसी तरह केशब महंत को भी फिर से मंत्री बनाकर सहयोगी दल असम गण परिषद (एजीपी) को महत्व दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम सरकार की स्थिरता और प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की रणनीति को दर्शाता है।

कैबिनेट विस्तार में चार नए चेहरों को पहली बार मंत्री बनाया गया है। इनमें अश्विनी राय सरकार, बिस्वजीत दैमारी, नीलिमा देवी और सुसांता बोरगोहैन शामिल हैं। इन नियुक्तियों को क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से अहम माना जा रहा है। खासतौर पर बिस्वजीत दैमारी को शामिल करना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।

क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन की कोशिश

सरकार ने इस विस्तार के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। बराक घाटी से आने वाले कौशिक राय और कृष्णेंदु पॉल को शामिल कर क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया है। इससे साफ है कि भाजपा नेतृत्व आगामी राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए व्यापक सामाजिक समीकरण साधने में जुटा है।

अनुभव और नए नेतृत्व के बीच संतुलन का प्रयास

इस विस्तार में कुछ पुराने चेहरों को मंत्रिमंडल से बाहर भी किया गया है। चंद्र मोहन पटोवारी, जोगेन मोहन और उरखाओ ग्वरा ब्रह्मा को इस बार जगह नहीं मिली। वहीं रंजीत कुमार दास को विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

नई कैबिनेट को देखकर साफ है कि सरकार ने अनुभव और नए नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। एक ओर जहां भरोसेमंद चेहरों को दोबारा जिम्मेदारी दी गई है, वहीं दूसरी ओर नए नेताओं को मौका देकर भविष्य की राजनीति को भी साधने का प्रयास किया गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई टीम राज्य के विकास एजेंडे को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।

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