असम की बाढ़ पर PIL से सुप्रीम कोर्ट ने किया किनारा

जनहित याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
असम की बाढ़ पर PIL से सुप्रीम कोर्ट ने किया किनारा
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नई दिल्ली-असम : असम और ब्रह्मपुत्र घाटी में बार-बार आने वाली बाढ़, नदी कटाव और जल निकासी की समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने याचिका में उठाए गए मुद्दों को संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने रजिस्ट्री से याचिका की प्रति सभी संबंधित अधिकारियों को भेजने और उनके स्तर पर उठाए गए मुद्दों की जांच कर उचित सुधारात्मक कदम उठाने को कहा। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अधिवक्ता उज्ज्वल गौर ने याचिका पर खुद पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिका में जिन प्रशासनिक कमियों का उल्लेख किया गया है, वे न्यायिक जांच के दायरे में आती हैं और इस मामले में संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया जाना चाहिए। हालांकि, पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए सुझावों और कमियों पर संबंधित अधिकारियों का ध्यान जाना चाहिए, लेकिन मामला मूल रूप से ‘कानूनी’ प्रकृति का नहीं है।

बाढ़ प्रबंधन की व्यवस्था पर उठाए सवाल

याचिका में कहा गया कि असम में हर साल बाढ़ और नदी कटाव से बड़े पैमाने पर नुकसान होता है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इन समस्याओं को पूरी तरह अपरिहार्य मानकर नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि बाढ़ नियंत्रण, नदी कटाव और जल निकासी के लिए कानून और विशेष संस्थागत व्यवस्था पहले से मौजूद है। PIL में ब्रह्मपुत्र बोर्ड अधिनियम, 1980, असम तटबंध एवं जल निकासी अधिनियम, 1953 और नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 का हवाला दिया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार, इन कानूनों में वैज्ञानिक अध्ययन, एकीकृत नदी बेसिन योजना और बाढ़, कटाव तथा जल निकासी से जुड़े उपायों के क्रियान्वयन की व्यवस्था की गई है।

CAG रिपोर्टों का भी हवाला

याचिका में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए बाढ़ नियंत्रण योजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और रखरखाव में कमियों का दावा किया गया। इसमें 2018 की CAG रिपोर्ट संख्या-5, जिसमें असम में बाढ़ नियंत्रण के प्रदर्शन ऑडिट का उल्लेख है, को भी आधार बनाया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार, रिपोर्ट में एकीकृत बेसिन-वार योजना, बाढ़-मैदान जोनिंग, हाइड्रोलॉजिकल एवं मॉर्फोलॉजिकल अध्ययन तथा बाढ़ नियंत्रण कार्यों की निगरानी से जुड़ी कमियां सामने आई थीं। याचिका में प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर अतिक्रमण, जल निकासी में रुकावट, बैकफ्लो, स्लुइस गेट से अपर्याप्त निकासी, गाद जमा होने और नदी की बदलती संरचना जैसे कारकों का भी उल्लेख किया गया, जिन्हें बाढ़ की स्थिति को प्रभावित करने वाले मुद्दों के रूप में पेश किया गया।

ब्रह्मपुत्र बोर्ड में तकनीकी पद खाली होने का दावा

PIL में ब्रह्मपुत्र बोर्ड की तकनीकी क्षमता को लेकर भी सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता ने 12 दिसंबर 2024 के लोकसभा में दिए गए आधिकारिक जवाब का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2024 में बोर्ड में स्वीकृत 182 तकनीकी पदों में से 65 पद खाली थे। याचिका में यह भी दावा किया गया कि तकनीकी विशेषज्ञों की कमी के कारण बाढ़ और नदी प्रबंधन से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन तथा दीर्घकालिक योजना प्रभावित हो सकती है।

1,112 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भी जिक्र

याचिकाकर्ता ने CAG की राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि 31 मार्च 2025 तक स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड में 1,112.50 करोड़ रुपये बिना इस्तेमाल के पड़े थे। इसके अलावा 2024-25 में जल संसाधन अनुदान के तहत 555.13 करोड़ रुपये की बचत का भी उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि PIL का उद्देश्य अदालत से किसी विशेष इंजीनियरिंग डिजाइन या बाढ़ को पूरी तरह समाप्त करने का निर्देश हासिल करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कानून के तहत जिम्मेदारी दी गई संस्थाएं अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करें।

विशेषज्ञ तंत्र बनाने की मांग

याचिका में बाढ़, नदी कटाव और जल निकासी की लगातार बनी समस्याओं की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय विशेषज्ञ तंत्र बनाने का प्रस्ताव रखा गया था। साथ ही वैज्ञानिक आधार पर अद्यतन हाइड्रोलॉजिकल, मॉर्फोलॉजिकल और ड्रेनेज अध्ययन कराने की मांग की गई। इसके अलावा बाढ़ नियंत्रण ढांचे का नियमित आकलन एवं रखरखाव, प्राकृतिक जल निकासी मार्गों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा, तकनीकी क्षमता बढ़ाने तथा निगरानी और जवाबदेही की मजबूत व्यवस्था बनाने के लिए भी निर्देश मांगे गए थे। याचिका में केंद्र सरकार, केंद्रीय जल आयोग, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, ब्रह्मपुत्र बोर्ड, असम सरकार और अन्य संबंधित राज्यों एवं अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

अदालत ने अधिकारियों के पाले में डाली गेंद

सुप्रीम कोर्ट ने PIL को सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया, लेकिन याचिका में उठाए गए मुद्दों को नजरअंदाज भी नहीं किया। अदालत के निर्देश के अनुसार अब याचिका की प्रति संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी, ताकि वे इसमें उठाई गई चिंताओं और सुझावों की जांच कर उचित सुधारात्मक कदम उठा सकें। ब्रह्मपुत्र बोर्ड इस बीच नदी बेसिन मास्टर प्लान, बाढ़ एवं कटाव प्रबंधन और समन्वित जल संसाधन विकास जैसे मुद्दों पर काम कर रहा है। जून 2026 में बोर्ड की बैठक में भी ब्रह्मपुत्र और बराक बेसिन के लिए एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन, बाढ़-कटाव नियंत्रण और सेडिमेंट मैनेजमेंट पर चर्चा हुई थी।

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