12 जनजातीय भाषाओं को मिली पाठ्यक्रम में जगह

अरुणाचल प्रदेश सरकार ने किया शामिल

12 जनजातीय भाषाओं को मिली पाठ्यक्रम में जगह
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ईटानगर : अरुणाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और सरकार से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में कक्षा VI से VIII तक के विद्यार्थियों के लिए जनजातीय मातृभाषाओं में पाठ्यपुस्तकों को तीसरी भाषा के विषय के रूप में शामिल किया है। राज्य सरकार ने यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने और राज्य की समृद्ध जनजातीय भाषाई विरासत के संरक्षण के उद्देश्य से शुरू की है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), अरुणाचल प्रदेश की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, तीसरी भाषा के विषय को पाठ्यक्रम संचालन, उपस्थिति, आकलन, मूल्यांकन, कक्षा में अगली श्रेणी में प्रोन्नति और अंकों के मामले में अन्य प्रमुख विषयों के समान माना जाएगा। स्कूल प्रमुखों और संबंधित शिक्षा अधिकारियों को इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया गया है। अधिसूचना के Annexure-I में अलग-अलग जिलों और संबंधित जनजातीय क्षेत्रों के लिए 12 भाषाओं की पाठ्यपुस्तकों की पहचान की गई है। इनमें आदि, अपातानी, आका (ह्रुसो), गालो, इडु, कमान, न्यीशी, सिंगफो, तागिन, ताई खामती, तांगसा और ताराओन शामिल हैं। आदि भाषा को ईस्ट सियांग, सियांग और अपर सियांग जिलों के अलावा लोअर दिबांग वैली और शी-योमी के आदि क्षेत्रों में पढ़ाया जाएगा। अपातानी के लिए लोअर सुबनसिरी, जबकि आका (ह्रुसो) के लिए पश्चिम कामेंग के आका बहुल क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं। गालो भाषा को लेपा राडा, लोअर सियांग और वेस्ट सियांग के अलावा अपर सुबनसिरी के गालो क्षेत्रों में शामिल किया गया है। इडु को दिबांग वैली तथा लोअर दिबांग वैली और लोहित के इडु क्षेत्रों के लिए निर्धारित किया गया है।

कई जिलों में न्यीशी भाषा

न्यीशी भाषा को सबसे व्यापक भौगोलिक क्षेत्रों में शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत ईस्ट कामेंग, ईटानगर कैपिटल रीजन, कामले, केई पन्योर, क्रा दादी, कुरुंग कुमे, पक्के केसांग और पापुम पारे जिले शामिल हैं। इसी तरह सिंगफो भाषा को चांगलांग और नामसाई के सिंगफो क्षेत्रों, तागिन को अपर सुबनसिरी, ताई खामती को नामसाई, तांगसा को चांगलांग तथा ताराओन को अंजॉ और लोहित के ताराओन क्षेत्रों के लिए निर्धारित किया गया है। सरकार का यह कदम राज्य की विभिन्न जनजातीय भाषाओं को औपचारिक स्कूली शिक्षा व्यवस्था में अधिक मजबूती से शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके जरिए विद्यार्थियों को अपनी स्थानीय मातृभाषा में सीखने का अवसर मिलने के साथ-साथ पारंपरिक भाषाओं के संरक्षण और अगली पीढ़ी तक उनके हस्तांतरण को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह पहल वर्ष 2021-22 के बजट में जनजातीय भाषाओं और लिपियों के प्रचार-प्रसार के लिए की गई घोषणा के अनुरूप भी है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों और संबंधित अधिकारियों को नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी है। अधिसूचना शिक्षा विभाग के सचिव कांतों डांगगेन, आईएएस की ओर से जारी की गई है और SCERT की निदेशक लई बागरा ने इसे डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित किया है। राज्य सरकार के अनुसार, जनजातीय भाषाओं को तीसरी भाषा के रूप में शामिल करने से अरुणाचल प्रदेश की विविध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को स्कूली पाठ्यक्रम में अधिक प्रत्यक्ष स्थान मिलेगा।


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