

ईटानगर : अरुणाचल प्रदेश ने उन्नत चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य में पहली बार किडनी प्रतिरोपण सर्जरी टोमो रिबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (टीआरआईएचएमएस), नाहरलागुन में सफलतापूर्वक की गई। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए इसे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। यह प्रतिरोपण रविवार को नई दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के वरिष्ठ प्रतिरोपण विशेषज्ञों और टीआरआईएचएमएस के चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने किया।
तीन साल से चल रही थी विशेषज्ञता बढ़ाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार पिछले करीब तीन वर्षों से सर गंगा राम अस्पताल के सहयोग से टीआरआईएचएमएस के डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही थी। इस सहयोग का उद्देश्य केवल एक बार प्रतिरोपण कराना नहीं, बल्कि राज्य में ऐसी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा विकसित करना है, जिसे आगे स्थानीय स्तर पर नियमित रूप से संचालित किया जा सके। सरकार ने प्रतिरोपण से जुड़ी विशेषज्ञता, चिकित्सा कर्मियों के प्रशिक्षण, आवश्यक तकनीकी सुविधाओं और संस्थागत क्षमता को विकसित करने की दिशा में चरणबद्ध तरीके से काम किया है। मुख्यमंत्री ने सर गंगा राम अस्पताल के प्रबंधन और वरिष्ठ चिकित्सकों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
राज्य में ही मिलेगा जटिल इलाज
अरुणाचल सरकार की इस पहल का प्रमुख उद्देश्य गंभीर और जटिल बीमारियों के उपचार के लिए मरीजों को राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता कम करना है। अगस्त 2026 में मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार सर गंगा राम अस्पताल के सहयोग से टीआरआईएचएमएस में अंग प्रतिरोपण सुविधा शुरू करने पर काम कर रही है। उस समय सरकार ने बताया था कि शुरुआत किडनी प्रतिरोपण से करने की योजना है। इस नीति का व्यापक उद्देश्य राज्य में ही उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना, मरीजों और उनके परिवारों पर बाहर जाकर इलाज कराने का आर्थिक तथा सामाजिक बोझ कम करना और टीआरआईएचएमएस को पूर्वोत्तर में उन्नत चिकित्सा सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। टीआरआईएचएमएस को राज्य का पहला आधुनिक मेडिकल कॉलेज अस्पताल बताया गया है, जिसका लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
अंग प्रतिरोपण के लिए वित्तीय सहायता भी
राज्य सरकार ने प्रतिरोपण को केवल अस्पताल की सुविधा तक सीमित नहीं रखा है। मुख्यमंत्री ऑर्गन ट्रांसप्लांट स्कीम के तहत किडनी प्रतिरोपण के लिए 12 लाख रुपये तक, बोन मैरो प्रतिरोपण के लिए 17 लाख रुपये तक और लिवर प्रतिरोपण के लिए 22 लाख रुपये तक वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य महंगे प्रतिरोपण उपचार के कारण परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है। सरकार ने पहले मुख्यमंत्री रीनल रिप्लेसमेंट सोसायटी के तहत किडनी संबंधी उपचार को सहायता दी थी। बाद में अंग प्रतिरोपण की जरूरतों को व्यापक रूप देने के लिए इसे मुख्यमंत्री ऑर्गन ट्रांसप्लांट सोसायटी के रूप में विस्तारित किया गया। जुलाई 2025 में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गवर्निंग बॉडी की बैठक भी हुई थी।
अंग प्रतिरोपण के लिए नियामकीय ढांचा भी तैयार
अरुणाचल प्रदेश सरकार ने अंग एवं ऊतक प्रतिरोपण की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर उपयुक्त प्राधिकरण का गठन भी किया है। जून 2025 की अधिसूचना में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ टीआरआईएचएमएस के एनेस्थीसियोलॉजी और सर्जरी विभाग के प्रमुखों को भी इसमें शामिल किया गया था। इस प्राधिकरण की जिम्मेदारियों में प्रतिरोपण की गुणवत्ता और दाता एवं प्राप्तकर्ता की प्रतिरोपण-पश्चात देखभाल की निगरानी भी शामिल है।
अगले चरण में प्रतिरोपण की संख्या बढ़ाने की तैयारी
मुख्यमंत्री खांडू ने कहा कि पहली सफल सर्जरी से टीआरआईएचएमएस के डॉक्टरों और नर्सों ने इस जटिल प्रक्रिया को अपनाने की क्षमता साबित की है। सरकार अब आने वाले समय में किडनी प्रतिरोपण की संख्या बढ़ाने पर काम करेगी। साथ ही टीआरआईएचएमएस के अन्य विभागों को भी मजबूत करने की प्रक्रिया जारी है। राज्य सरकार ने अंग प्रतिरोपण सेवाओं को व्यापक स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बनाने के लिए पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ समेत विशेषज्ञ संस्थानों के साथ तकनीकी सहयोग की संभावनाएं भी तलाश की थीं। जुलाई 2025 में सरकार ने टीआरआईएचएमएस में अंग प्रतिरोपण सेवाओं को चरणबद्ध, सुरक्षित और प्रभावी तरीके से शुरू करने के लिए पीजीआईएमईआर से तकनीकी सहयोग पर चर्चा की थी।
टीआरआईएचएमएस को विशेषज्ञ चिकित्सा केंद्र बनाने की दिशा
सरकार की योजना टीआरआईएचएमएस को केवल सामान्य उपचार और मेडिकल शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय उच्च विशेषज्ञता वाले उपचारों का केंद्र बनाने की है। राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीआरआईएचएमएस में आधुनिक चिकित्सा ढांचे के साथ मेडिकल शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। पहले किडनी प्रतिरोपण की सफलता इस योजना में एक महत्वपूर्ण चरण है। इससे राज्य में किडनी रोगियों के लिए स्थानीय स्तर पर उपचार की संभावनाएं बढ़ेंगी और भविष्य में अन्य जटिल अंग प्रतिरोपण सेवाओं के विस्तार का आधार तैयार हो सकता है।