जीरो कीवी का अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश, सिंगापुर-दुबई भेजने की तैयारी

स्थानीय किसानों को विदेशी बाजारों से जोड़ने का प्रयास

जीरो कीवी का अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश, सिंगापुर-दुबई भेजने की तैयारी
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ईटानगर : अरुणाचल प्रदेश की जीरो घाटी में उत्पादित कीवी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) सिंगापुर और दुबई के लिए दो मीट्रिक टन कीवी की प्रायोगिक खेप भेजने की संभावना तलाश रहा है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय किसानों को विदेशी बाजारों से जोड़ना और राज्य के बागवानी उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं का आकलन करना है। इस संबंध में एक प्रारंभिक बैठक एक अक्टूबर को जीरो स्थित जिला सचिवालय भवन में आयोजित की गई। इसमें एपीडा, राज्य के व्यापार एवं वाणिज्य विभाग, जिला प्रशासन और स्थानीय कीवी उत्पादकों ने भाग लिया। एपीडा के गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय के सलाहकार सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि प्रस्तावित खेप से उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता मानकों, विपणन व्यवस्था और निर्यात संबंधी चुनौतियों का आकलन किया जा सकेगा।

गुणवत्ता और प्रमाणन पर जोर

जिला बागवानी अधिकारी हिबू दांते ने कहा कि जीरो कीवी की खेती परंपरागत रूप से रासायनिक इनपुट के बिना की जाती है। ऐसे में जैविक प्रमाणन की संभावनाएं हैं। उन्होंने किसानों को निर्यात प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण तथा तकनीकी सहायता की आवश्यकता बताई। जीरो कीवी ग्रोअर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के अध्यक्ष बामिन सीरी के अनुसार, सहकारी समिति में लगभग 200 पंजीकृत किसान हैं। घाटी में एलिसन, ब्रूनो, मोंटी और हेवर्ड की प्रमुख किस्मों की खेती होती है। उन्होंने दो टन कीवी उपलब्ध कराने में सहयोग का भरोसा दिया।

पैकेजिंग और परिवहन की चुनौती

जिला कृषि अधिकारी लीगांग अनिया ने स्वचालित ग्रेडिंग मशीन, परिवहन सब्सिडी और बेहतर लॉजिस्टिक्स की जरूरत बताई। व्यापार विकास अधिकारी ताई अरुण ने पैकेजिंग, ग्रेडिंग, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और सामूहिक विपणन पर जोर दिया। राज्य सरकार नवंबर 2026 में भारतीय विदेश व्यापार संस्थान, कोलकाता के सहयोग से निर्यात प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रही है। पांग्साउ दर्रे के रास्ते दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों तक पहुंच की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। प्रस्तावित निर्यात से जीरो कीवी को वैश्विक बाजार में स्थापित करने की दिशा में शुरुआती अनुभव मिलने की उम्मीद है।

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