अंडमान निकोबार बुक फेयर का भव्य समापन: किताबों, संस्कृति और संवाद का उत्सव

स्कूली छात्रों ने पुस्तक मेले को बनाया जीवंत, स्टोरी टेलिंग का जी भर लिया आनंद
अंडमान निकोबार बुक फेयर का भव्य समापन: किताबों, संस्कृति और संवाद का उत्सव
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अंडमान निकोबार के श्री विजय पुरम में नौ दिन तक चले पुस्तक मेले के समापन दिवस का मुख्य आकर्षण रहा चिल्ड्रन्स कॉर्नर, जहाँ शहर के विभिन्न विद्यालयों से आए 500 से अधिक छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दिन की शुरुआत कथाकार प्रियंका चटर्जी के रोचक स्टोरी टेलिंग सत्र से हुई, जिसमें रंग-बिरंगे प्रॉप्स, आकर्षक वेशभूषा, नाटकीय अंदाज़ और भावपूर्ण प्रस्तुति ने बच्चों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संवाद शैली में प्रस्तुत कहानियों का बच्चों ने खूब आनंद लिया कभी वे हंसते तो कभी खुशी के मारे तालियां बजाते। उनके उत्साह ने वातावरण को आनंद और हर्ष से भर दिया।

विद्यार्थियों ने विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से मंच को जीवंत कर दिया। पंजाबी लोक नृत्य, कश्मीरी नृत्य, निकोबारी नृत्य, बंगाली नृत्य, तेलुगु लोक नृत्य और शिव तांडव जैसी प्रस्तुतियों ने भारत की बहुरंगी सांस्कृतिक विरासत का सुंदर संगम पेश किया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चों की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और पुस्तकें पुरस्कार में दी गयीं ।

साहित्यिक सत्रों में भी विचारों का समृद्ध आदान-प्रदान देखने को मिला। “आइलैंड ऑफ स्टोरीज़: फिल्म मेकिंग, फेमिनिन ग्रिट एंड द पोएट्री ऑफ एवरीडे लाइफ” विषय पर आयोजित संवाद सत्र में डॉ. मीना लोंगजाम ने दीप सैकिया के साथ चर्चा करते हुए बताया कि उनका अकादमिक शोध किस प्रकार उनके फिल्म निर्माण को वास्तविक जीवन के अनुभवों, सांस्कृतिक स्मृतियों और सामाजिक संदर्भों से जोड़ता है। चंद्रचूर घोष ने “बियॉन्ड वन नैरेटिव: सुभाष चंद्र बोस एंड इंडिया’स स्ट्रगल फॉर इंडिपेंडेंस” विषय पर चर्चा में नेताजी को “असुविधाजनक राष्ट्रवादी” बताते हुए कहा कि उनका जीवन और राजनीति सरल व्याख्याओं से परे है।

अभिलेखीय शोध और नवीन विद्वतापूर्ण दृष्टिकोणों के आधार पर उन्होंने श्रोताओं को इतिहास की स्थापित धारणाओं को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित किया। सांस्कृतिक संध्या में पुलिस म्यूजिकल बैंड की प्रस्तुति, स्कूली छात्रों के नृत्य, कवि सम्मेलन, पुलिस एंटरटेनमेंट ग्रुप द्वारा नशा-विरोधी नाटक तथा कला पानी बैंड के संगीत से समारोह का रंगारंग समापन किया गया। दर्शकों की तालियों और उत्साह ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।

नौ दिन ( 14 फरवरी से 22 फरवरी) तक चले इस पुस्तक मेले ने न केवल पुस्तकों के प्रति रुचि जगाई, बल्कि रचनात्मक अभिव्यक्ति, बौद्धिक संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के लिए यह आयोजन एक महत्वपूर्ण साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच के रूप में स्थापित हो चुका है, जो हर वर्ष लोगों को विचारों, शब्दों और कला के उत्सव में जोड़ता है।

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