महाभारत की याद दिलाती कोलकाता का 'शांति सारमेय' आलोका

अमेरिका में बौद्ध भिक्षुओं संग शांति पदयात्रा से बनी वैश्विक पहचान
महाभारत की याद दिलाती कोलकाता का 'शांति सारमेय' आलोका
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प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : कोलकाता की गलियों में जन्मा एक आवारा कुत्ता आज दुनिया भर में शांति और करुणा का प्रतीक बन चुका है। उसका नाम है 'आलोका' या 'आलोक'। कभी फुटपाथों और कूड़ेदानों के पास भोजन तलाशने वाले आलोका आज 19 बौद्ध भिक्षुओं के साथ अमेरिका की ऐतिहासिक शांति पदयात्रा में शामिल है और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में है।

26 अक्टूबर से आलोका टेक्सास से वॉशिंगटन डीसी की ओर पैदल चल रहा है। यह पदयात्रा करीब 2,300 मील लंबी है, जो अमेरिका के 10 राज्यों से होकर 13 फरवरी को समाप्त होगी। कभी वह भिक्षुओं से आगे निकल जाता है, कभी थककर सड़क किनारे बैठ जाता है, लेकिन उनका साथ नहीं छोड़ता। रास्ते में लोग उसके साथ तस्वीरें ले रहे हैं, सेल्फी बना रहे हैं, वीडियो सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं और कई अंतरराष्ट्रीय वेबसाइटों पर उसकी कहानी प्रकाशित हो चुकी है।

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सूत्रों से पता चला हैं कि आलोका की कहानी की जड़ें कोलकाता में हैं। कुछ महीने पहले बौद्ध भिक्षुओं का यह दल बोधगया और सारनाथ जैसे तीर्थस्थलों के बाद कोलकाता पहुंचा था। वहीं 112 दिनों की भारत यात्रा के दौरान यह आवारा कुत्ता उनके साथ हो लिया। तब उसका कोई नाम नहीं था। भिक्षुओं ने ही उसे 'आलोका' नाम दिया, जिसका अर्थ है—प्रकाश।

भारत से लौटते समय वे उसे छोड़ना नहीं चाहते थे। सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर वे उसे अपने साथ अमेरिका ले गए। आज वह उनके परिवार का सदस्य है, जिसे प्यार से 'शांति सारमेय' भी कहा जाता है। आलोका की यह पदयात्रा महाभारत के उस अमर प्रसंग की याद दिलाती है, जब महाप्रस्थान के समय धर्म सारमेय के रूप में युधिष्ठिर के साथ चला था। तब भी और आज भी संदेश एक ही है—सच्चा धर्म करुणा, निष्ठा और साथ निभाने में है।

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