मेले में सजेगा ‘बंगाल के सात मंदिर’ का विशेष पवेलियन

श्रद्धालुओं को होंगे सात तीर्थों के दर्शन,आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम
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प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: 'सब तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार'—इस प्रसिद्ध कहावत को इस वर्ष गंगासागर मेले में नया और जीवंत रूप मिल रहा है। 2026 के मेले की सबसे बड़ी विशेषता है ‘बंगाल के सात मंदिर’ परियोजना, जिसके तहत राज्य के प्रसिद्ध मंदिरों की त्रि-आयामी (3-D) प्रतिकृतियाँ मेले के परिसर में स्थापित की जा रही हैं।

इन प्रतिकृतियों में दीघा का जगन्नाथ मंदिर, कोलकाता का कालीघाट मंदिर, दक्षिणेश्वर काली मंदिर, बेलूड़ मठ, दार्जिलिंग का महाकाल मंदिर, बीरभूम का तारापीठ और कूचबिहार का ऐतिहासिक मदनमोहन मंदिर शामिल हैं। आधुनिक तकनीक से तैयार ये मॉडल इतने सजीव हैं कि श्रद्धालुओं को वास्तविक मंदिरों के दर्शन का अनुभव होगा। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्री गंगासागर आते हैं और कपिलमुनि मंदिर में पूजा कर पुण्य अर्जित करते हैं लेकिन समय की कमी और लंबी दूरी के कारण अधिकांश लोग बंगाल के अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों तक नहीं जा पाते।

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने यह अभिनव पहल की है, ताकि श्रद्धालु एक ही स्थान पर बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। जिलाधिकारी अरविंद कुमार मीणा ने स्वयं सागर मेला परिसर में मंदिरों के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया है। इसके साथ ही, पिछले वर्ष की तरह इस बार भी गंगासागर समुद्र तट पर भव्य ‘सागर आरती’ का आयोजन होगा, जो श्रद्धा, संस्कृति और पर्यटन को एक सूत्र में बांध देगा।

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