निजी विद्यालयों पर व्यावसायीकरण एवं शोषण के आरोप

अभिभावकों के हित में हस्तक्षेप की मांगमुख्य सचिव को सौंपा गया प्रतिवेदन
निजी विद्यालयों पर व्यावसायीकरण एवं शोषण के आरोप
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में निजी विद्यालयों द्वारा बढ़ते व्यावसायीकरण एवं कथित शोषण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। इस मुद्दे को उठाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता वी. डी. लेजू ने प्रशासन से विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया है। मुख्य सचिव, अंडमान एवं निकोबार प्रशासन को संबोधित अपने प्रतिवेदन में उन्होंने कहा है कि शिक्षा, जो कि युवा पीढ़ी के निर्माण हेतु एक उत्कृष्ट सेवा होनी चाहिए, धीरे-धीरे लाभ कमाने के उद्देश्य से संचालित व्यवसाय का रूप लेती जा रही है। कई निजी विद्यालयों द्वारा अत्यधिक शुल्क वसूला जा रहा है, जो उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं एवं सेवाओं के अनुरूप नहीं है। इसके अतिरिक्त, शैक्षणिक सत्र के दौरान विभिन्न प्रकार के शुल्क जैसे सत्र शुल्क एवं प्रवेश शुल्क के नाम पर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई विद्यालय अभिभावकों को पुस्तकों, वर्दी एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री केवल निर्धारित दुकानों से ही खरीदने के लिए बाध्य करते हैं, जहां इन वस्तुओं की कीमतें अत्यधिक होती हैं। निर्धारित पाठ्यक्रम की पुस्तकों की ऊंची कीमतें भी मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई हैं। पारदर्शिता की कमी को भी एक गंभीर समस्या बताया गया है। कई निजी विद्यालय समय से पहले अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अनिवार्य पुस्तक सूची प्रकाशित नहीं करते, जिससे अभिभावकों के पास सीमित विकल्प रह जाते हैं और उन्हें महंगे स्रोतों से सामग्री खरीदने के लिए विवश होना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों की बार-बार अदला-बदली एवं अनुभवहीन शिक्षकों की नियुक्ति से शिक्षा की गुणवत्ता, निरंतरता एवं स्थिरता प्रभावित हो रही है। विद्यालय परिवहन शुल्क में हो रही वृद्धि भी अभिभावकों के लिए एक बड़ा बोझ बन गई है। कई मामलों में बिना उचित नियमन या औचित्य के परिवहन शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे जवाबदेही पर प्रश्न उठ रहे हैं। और भी गंभीर रूप से, विद्यालय परिवहन प्रणाली में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के मामले सामने आए हैं। बसों में अत्यधिक भीड़ एवं निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन न किए जाने से विद्यार्थियों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। यह भी देखा गया है कि कई स्कूल बसें अनिवार्य सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन नहीं करती हैं। इस प्रतिवेदन में कहा गया है कि शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ता यह व्यावसायीकरण उसके मूल उद्देश्य को कमजोर कर रहा है तथा अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक एवं मानसिक दबाव डाल रहा है। अतः प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि निजी विद्यालयों के संचालन में उचित नियमन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षा सभी के लिए सुलभ, निष्पक्ष एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास पर केंद्रित बनी रहे।


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