

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के चिन्हित इलाकों में AFSPA यानी सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम को 1 अक्टूबर से अगले छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी गजट अधिसूचना के मुताबिक यह फैसला तीनों राज्यों में कानून-व्यवस्था की स्थिति की आगे की समीक्षा के बाद लिया गया है।
मणिपुर में अधिकांश क्षेत्र अधिनियम के दायरे में
मणिपुर में पूरे राज्य को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित रखने का फैसला किया गया है, लेकिन पांच जिलों के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है। इनमें इम्फाल पश्चिम के इम्फाल, लैम्पफेल, सिटी, सिंगजामेई, पटसोई और वांगोई थाने शामिल हैं। इम्फाल पूर्व के पोरोमपट, हेइंगांग और इरीलबांग, थौबल के थौबल, बिष्णुपुर के बिष्णुपुर और नामबोल तथा काकचिंग के काकचिंग थाना क्षेत्र को भी ‘अशांत क्षेत्र’ की अधिसूचना से बाहर रखा गया है।
नागालैंड के नौ जिलों में AFSPA जारी
नागालैंड में दीमापुर, निउलैंड, चुमौकेदिमा, मोन, किफिरे, नोकलाक, फेक, पेरेन और मेलुरी जिलों को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया गया है। इसके अलावा कोहिमा, मोकोकचुंग, लोंगलेंग, वोखा और जुन्हेबोटो जिलों के 21 पुलिस थाना क्षेत्रों में भी AFSPA लागू रहेगा। इससे पहले भी केंद्र सरकार नागालैंड में AFSPA के दायरे की समय-समय पर समीक्षा कर इसमें कुछ इलाकों को बाहर करती रही है।
अरुणाचल के तीन जिलों में कानून लागू
अरुणाचल प्रदेश में AFSPA तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों में जारी रहेगा। इसके अलावा असम की सीमा से लगे नामसाई जिले के नामसाई, महादेवपुर और चौखाम पुलिस थाना क्षेत्रों को भी इसके दायरे में रखा गया है। गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड में तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग को लंबे समय से AFSPA के तहत ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किए जाने की अधिसूचनाएं दर्ज हैं।
मिजोरम, मेघालय और त्रिपुरा से हट चुका है AFSPA
पूर्वोत्तर में AFSPA का दायरा पिछले वर्षों में लगातार घटा है। मिजोरम, मेघालय और त्रिपुरा में यह कानून पूरी तरह लागू नहीं है, जबकि असम, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्से अभी भी इसके दायरे में हैं। केंद्र सरकार ने पहले भी पूर्वोत्तर के कई इलाकों से AFSPA हटाने की प्रक्रिया को कानून-व्यवस्था में सुधार से जोड़कर बताया है।
AFSPA के तहत मिलती हैं विशेष शक्तियां
AFSPA की धारा 3 के तहत किसी क्षेत्र को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया जा सकता है। इसके बाद अधिनियम के प्रावधानों के तहत सशस्त्र बलों को निर्धारित परिस्थितियों में अभियान चलाने और कानून-व्यवस्था से जुड़े विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं। केंद्र की ताजा अधिसूचना में कहा गया है कि तीनों राज्यों में कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बाद संबंधित क्षेत्रों को छह महीने के लिए ‘अशांत क्षेत्र’ बनाए रखना जरूरी माना गया है। यह अवधि 1 अक्टूबर से छह महीने की है, हालांकि संबंधित अधिसूचना को इससे पहले भी वापस लिया जा सकता है।