

बीकानेर: भारत में कई ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल हैं, जिनकी स्थापत्य कला और उनसे जुड़ी कहानियां लोगों को हैरान कर देती हैं। राजस्थान के बीकानेर में स्थित भांडासर जैन मंदिर भी ऐसा ही एक अनोखा धार्मिक स्थल है। करीब 550 साल पुराने इस मंदिर को लेकर स्थानीय स्तर पर मान्यता है कि इसके निर्माण में पानी की जगह घी का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि इस दावे का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
1468 में शुरू हुआ था निर्माण
स्थानीय इतिहास के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1468 में जैन व्यापारी भांडासा ओसवाल ने शुरू कराया था। उस समय बीकानेर में पानी की भारी कमी और सूखे की स्थिति होने की बात कही जाती है। इसी वजह से मंदिर के निर्माण में पानी के स्थान पर घी इस्तेमाल किए जाने की कहानी प्रचलित है।
लोककथा के अनुसार, भांडासा ने लंबे समय तक एक-एक बूंद घी एकत्र किया। उस समय लोग उन्हें लालची और कंजूस समझकर उनका मजाक उड़ाते थे। लेकिन मान्यता है कि बाद में उन्होंने करीब 40 हजार किलोग्राम घी एकत्र कर मंदिर के निर्माण में उसका इस्तेमाल किया।
स्थानीय लोगों का दावा है कि चूने और सुरखी के साथ शुद्ध घी मिलाकर मंदिर का निर्माण किया गया था। हालांकि विशेषज्ञों और विज्ञान की दृष्टि से केवल घी के इस्तेमाल से इस तरह के निर्माण की बात प्रमाणित नहीं है। इसलिए इसे मुख्य रूप से स्थानीय लोककथा और मान्यता के रूप में देखा जाता है।
84 साल में पूरा हुआ मंदिर
मंदिर का निर्माण शुरू होने के करीब 46 साल बाद 1514 में भांडासा ओसवाल का निधन हो गया। वह मंदिर को पूर्ण रूप में नहीं देख सके। उनके निधन के बाद भी निर्माण कार्य जारी रहा और आखिरकार वर्ष 1554 में मंदिर बनकर तैयार हुआ। इस तरह इसके निर्माण में करीब 84 वर्ष लगे।
तीन मंजिला यह मंदिर लाल बलुआ पत्थर और सफेद पत्थर से बनाया गया है। इसकी दीवारों और स्तंभों पर बारीक नक्काशी, रंगीन चित्रकारी और कांच की कलाकृतियां देखने को मिलती हैं। मंदिर में जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों से जुड़ी कथाओं को भी उकेरा गया है।
सुमतिनाथ को समर्पित है मंदिर
भांडासर जैन मंदिर जैन धर्म के पांचवें तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ को समर्पित है। यहां उन्हीं की पूजा की जाती है। वर्तमान में मंदिर का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किया जाता है।
मंदिर से जुड़ी एक और स्थानीय मान्यता है कि गर्मियों में जब बीकानेर का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है, तब मंदिर के कुछ हिस्सों से घी जैसा पदार्थ निकलता है। कुछ लोग इसे मक्खन भी बताते हैं। हालांकि इस दावे की भी कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।
इन लोककथाओं और मान्यताओं के बावजूद भांडासर जैन मंदिर अपनी अनोखी स्थापत्य शैली, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक आस्था के कारण देश-विदेश के पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।