

कोलकाता: राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को और बेहतर बनाने तथा सरकारी कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए करीब साढ़े तीन लाख महत्वपूर्ण कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार के ‘कर्मयोगी मिशन’ के तहत संचालित ‘आईगॉट (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) कर्मयोगी’ प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। नवान्न सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों को उनकी कार्यभूमिका के अनुरूप चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में दक्षता बढ़ाने के साथ आधुनिक तकनीक और उन्नत प्रणालियों के व्यावहारिक इस्तेमाल की जानकारी भी दी जाएगी।
इस पूरी प्रक्रिया की नोडल एजेंसी राज्य के ‘नेताजी सुभाष प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान’ को बनाया गया है। अगले 15 दिनों के भीतर करीब साढ़े तीन लाख स्थायी राज्य सरकारी कर्मचारियों को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए तेजी से काम चल रहा है और अधिकांश विभागों के कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू भी हो चुका है।
राज्य के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से जारी निर्देशिका के अनुसार, गृह एवं पर्वतीय मामलों, वित्त, कृषि, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक निर्माण, सिंचाई एवं जलमार्ग तथा कार्मिक विभाग के कर्मचारियों को पहले चरण में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक विभाग में एक प्रमुख अधिकारी को इस प्रक्रिया की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभागों के अधीन सभी अधिकारी, कर्मचारी और फील्ड स्तर के कर्मियों के लिए प्रशिक्षण में शामिल होना अनिवार्य किया गया है।
अन्य विभागों के लिए भी प्रशिक्षण का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच संबंधित निर्देशिका का व्यापक प्रचार करने को कहा गया है। विभागीय और फील्ड स्तर के कार्यालयों में नोडल अधिकारी या प्रशासक के रूप में कम से कम संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को नामित करना होगा। इन अधिकारियों की पूरी जानकारी नेताजी सुभाष प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान को भेजी जाएगी।
यह प्रशिक्षण नेताजी सुभाष प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान और केंद्रीय संस्था ‘कर्मयोगी भारत’ के संयुक्त प्रयास से चल रहा है। इसके लिए प्रत्येक विभाग की सभी शाखाओं में कैपेसिटी बिल्डिंग यूनिट बनाने का निर्देश दिया गया है। प्रशिक्षण ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से दिया जा रहा है। जिन विभागों में अभी तक कैपेसिटी बिल्डिंग यूनिट नहीं बनी है, वहां इसे जल्द तैयार करने को कहा गया है।
इन इकाइयों के माध्यम से कर्मचारियों के लिए ‘रोल-बेस्ड कैपेसिटी बिल्डिंग प्लान’ यानी उनकी जिम्मेदारियों और कार्यभूमिका के अनुसार कौशल विकास की योजना तैयार की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से राज्य के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यक्षमता में काफी वृद्धि होगी। खासकर तकनीक आधारित कामकाज में दक्षता बढ़ने से समय की बचत होगी और सरकारी सेवाओं का बेहतर परिणाम मिल सकेगा।
केंद्र की ओर से इस प्रशिक्षण की प्रक्रिया काफी पहले शुरू की गई थी, लेकिन पश्चिम बंगाल में अब इसकी शुरुआत हुई है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशिक्षण प्रक्रिया को गति दी गई है। सभी विभागों को इसमें पूरा सहयोग करने और निर्धारित समय के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है। नोडल एजेंसी के अनुसार, करीब डेढ़ से दो सप्ताह के भीतर प्रशिक्षण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।