कोर्ट के आदेश के बावजूद क्यों नहीं हो पाया नामांकन

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एफिडेविट के साथ जवाब दें : हाई कोर्ट
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद पंचायत चुनाव में उम्मीदवार क्यों नहीं नामांकन दाखिल कर पाएं। जस्टिस राजाशेखर मंथा ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवायी करते हुए राज्य सरकार के एडवोकेट से इसका जवाब तलब किया। पुलिस की भूमिका पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हद तो यह है कि इस मामले में भांगड़ थाने में एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। जस्टिस मंथा ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि एफिडेविट दाखिल कर के जवाब दें कि इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है।
जस्टिस मंथा ने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक दलों से जुड़ा मामला ही नहीं है। बल्कि कोर्ट के आदेश का उलंघन का मामला है। माकपा उम्मीदवारों की तरफ से बहस करते हुए एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्या ने कहा कि पुलिस ने कोर्ट के साथ धोका किया है। कोर्ट के आदेश के तहत उन्हें नामांकन दाखिल करने के लिए ले जाया गया लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस उन्हें दंगाइयों के हवाले कर के किनारे हट गई। कोर्ट में एक वीडिओ भी पेश किया गया जिसमें एक व्यक्ति कह रहा था कि उसे पांच हजार रुपए दे कर हमला करने के लिए यहां लाया गया है। नामांकन दाखिल करने वालों को एक कमरे में बंद कर दिया गया और इसके बाद उनकी जम कर‌ पिटाई की गई। धारदार हथियारों से हमला किया गया। राज्य सरकार को जवाब देना पड़ेगा कि पुलिस कोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं कर पायी। दंगाइयों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

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