'मतदाता सूची से हजारों नाम गायब, शांतिपूर्ण चुनाव संभव नहीं'

मंत्री अरूप राय ने चुनाव आयोग पर बोला हमला बेलूर मठ में मुख्य चुनाव आयुक्त की टिप्पणी पर हावड़ा में तृणमूल की प्रेस कॉन्फ्रेंस कई ‘वैध मतदाताओं’ को सामने लाकर उठाये सवाल
Banik family in Panihati worried as their names go missing from voter list
सांकंतिक फोटो REP
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : हावड़ा में मतदाता सूची को लेकर सियासत तेज हो गई है। राज्य के मंत्री अरूप राय ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जाने के बाद शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है। मंगलवार को हावड़ा सदर में All India Trinamool Congress की ओर से एक पत्रकार सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में मंत्री अरूप राय के साथ सदर अध्यक्ष गौतम चौधुरी और युवा अध्यक्ष कैलाश मिश्रा भी मौजूद थे। इस दौरान ऐसे कई मतदाताओं को भी लाया गया जिनका दावा है कि उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है।

बेलूर मठ की टिप्पणी पर उठाए सवाल : दरअसल, हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने Belur Math के दौरे के दौरान कहा था कि चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में भयमुक्त और हिंसामुक्त चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी बयान को लेकर मंत्री ने कहा कि “पुण्यभूमि बेलूर मठ में खड़े होकर मुख्य चुनाव आयुक्त ने गलत बातें कही हैं। जब बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम ही सूची से हटा दिए गए हैं, तब स्वच्छ और शांतिपूर्ण चुनाव की बात कैसे की जा सकती है।”

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल : मंत्री अरूप राय ने यह भी आरोप लगाया कि जिस तरह से चुनाव आयोग काम कर रहा है, उससे उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी कई चुनाव आयुक्त रहे हैं, लेकिन इस तरह का रवैया पहले कभी देखने को नहीं मिला। उनका आरोप है कि आयोग “किसी विशेष राजनीतिक एजेंडे को लागू करने की दिशा में काम कर रहा है।”

‘मृत और वंचित मतदाताओं’ को किया गया पेश : प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तृणमूल की ओर से कुछ ऐसे लोगों को भी सामने लाया गया जिनका दावा है कि उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है या सूची में गड़बड़ी है। इन लोगों ने भी चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और अपने मताधिकार की बहाली की मांग की। तृणमूल नेताओं का कहना है कि यदि इस तरह मतदाताओं के नाम हटाए जाते रहे तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होगी और निष्पक्ष चुनाव कराना मुश्किल हो जाएगा।


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