हावड़ा में अंतिम मतदाता सूची से कई हिंदीभाषी मतदाताओं के नाम हटे

कई विधानसभा क्षेत्रों में हजारों नाम हटे, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के संशोधन के बाद हावड़ा जिले में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से हटने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, हटाए गए नामों में उल्लेखनीय संख्या हिंदीभाषी मतदाताओं की बताई जा रही है, जिससे राजनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष सर्वेक्षण और सत्यापन प्रक्रिया के तहत मृत, दूसरे राज्यों में रहने वाले या एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज कराने वाले मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। हालांकि हावड़ा शहर के कई विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नाम कटने के कारण स्थानीय स्तर पर चिंता और चर्चा बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार उत्तर हावड़ा विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2025 की सूची में करीब 2.22 लाख मतदाता थे। संशोधन के बाद लगभग 3,418 नाम सूची से हटा दिए गए हैं और करीब 17 हजार नाम अभी भी जांच के दायरे में हैं। मध्य हावड़ा में लगभग 2.22 लाख मतदाताओं में से करीब एक हजार नाम हटे हैं, जबकि हजारों नामों की जांच अभी जारी है। शिवपुर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 2,253 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और करीब 11 हजार नामों पर अभी निर्णय होना बाकी है।

हावड़ा दक्षिण और बाली क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में नामों की जांच चल रही है और कई नाम सूची से हटाए गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हटाए गए मतदाताओं में बड़ी संख्या गैर-बंगाली हिंदीभाषी समुदाय की होने से आगामी चुनावों पर इसका असर पड़ सकता है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि कई ऐसे मतदाता भी सूची से हट गए हैं जो वर्षों से हावड़ा में रह रहे हैं। इस बारे में हावड़ा उत्तर के विधायक गौतम चौधरी ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में भी कई वोटरों के नाम को सूची से हटाया गया है। जाे कि यहीं पर पैदा हुए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक भी मतदाता का नाम कटने नहीं देंगे। वहीं भाजपा नेताओं का दावा है कि सूची से मृत या दूसरे स्थानों पर रहने वाले लोगों के नाम हटाकर चुनावी सूची को सही किया गया है। राजनीतिक हलकों में अब इस बात को लेकर चर्चा है कि बड़ी संख्या में हिंदीभाषी मतदाताओं के नाम हटने से आगामी विधानसभा चुनाव में किस दल को फायदा या नुकसान होगा।


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