

कोलकाता : दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के अंतर्गत आने वाले स्टेशनों पर पेयजल की उपलब्धता, गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर रखरखाव, सफाई, जांच और सुधार कार्य किए जा रहे हैं। रेलवे की ओर से पानी की टंकियों, पाइपलाइनों, फिल्टर और क्लोरीनेशन प्लांट की नियमित निगरानी की जा रही है।
रेलवे के अनुसार, विभिन्न सेक्शनों में पानी के स्रोतों, ट्रीटमेंट एवं फिल्ट्रेशन प्लांट, भूमिगत और ओवरहेड टंकियों, पीवीसी टंकियों, वाटर बूथ और पानी वितरण केंद्रों का निरीक्षण किया जा रहा है। कुल 24,033 पानी की टंकियों में से 14,248 (59.23 प्रतिशत) की सफाई पूरी कर ली गई है।
पानी की आपूर्ति से जुड़ी कमियों को दूर करने के लिए 167 स्थानों को चिन्हित किया गया है। इनमें 39 स्थानों पर खराब पानी की टंकियों, पाइपलाइनों और फिल्टर को प्राथमिकता के आधार पर बदला जा रहा है, जबकि 33 स्थानों पर काम जारी है। वहीं, 81 स्थानों पर पाइपलाइनों की मरम्मत या उन्हें बदलने का कार्य पूरा किया जा चुका है।
52 फिल्टर की सफाई, सभी 63 क्लोरीनेशन प्लांट की जांच
दक्षिण पूर्व रेलवे में मौजूद 55 प्रेशर और ग्रेविटी फिल्टर में से 52 की सफाई और आवश्यक रखरखाव किया जा चुका है। सफाई के दौरान जमा गंदगी और अशुद्धियों को हटाया गया तथा जरूरत के अनुसार खराब उपकरणों को बदला गया।
रेलवे के पास मौजूद सभी 63 क्लोरीनेशन प्लांट का निरीक्षण और रखरखाव किया गया है। पानी में क्लोरीन की उचित मात्रा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकतानुसार क्लोरीन डोजिंग को नियंत्रित किया गया।
पानी की गुणवत्ता जांच के लिए नमूने एकत्र
वाटर कूलर और जल शुद्धिकरण इकाइयों के रखरखाव के लिए दक्षिण पूर्व रेलवे में वार्षिक रखरखाव अनुबंध (AMC) लागू है। पानी की भंडारण टंकियों की सफाई और निर्धारित रखरखाव हर महीने किया जा रहा है। इसके अलावा, वाटर कूलर, नल और फिटिंग में लीकेज को रोकने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
रेलवे के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के समन्वय से पानी की गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार 1,561 पानी के नमूनों की अवशिष्ट क्लोरीन स्तर (RCL), 283 नमूनों की बैक्टीरियोलॉजिकल और 21 नमूनों की रासायनिक जांच के लिए नमूने एकत्र किए गए हैं।
रेलवे की ओर से पानी के स्रोतों, फिल्ट्रेशन प्लांट, ओवरहेड और भूमिगत टंकियों, पाइपलाइनों, हैंडपंप तथा बोरवेल प्रणालियों का नियमित निरीक्षण भी किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जा रहा है, ताकि स्टेशनों पर सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।