नई दिल्ली : भारतीय रेलवे अगस्त 2026 से अपनी लगभग 40 साल पुरानी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को पूरी तरह बदलने जा रहा है। वर्ष 1986 से इस्तेमाल हो रही यह प्रणाली अब नई और अधिक क्षमता वाली डिजिटल प्रणाली से प्रतिस्थापित की जाएगी। रेलवे मंत्रालय का कहना है कि इससे यात्रियों को टिकट बुकिंग में अधिक सुविधा, तेज सेवा और बेहतर अनुभव मिलेगा।
रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित रेल भवन में एक समीक्षा बैठक की। बैठक में रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि नई प्रणाली लागू होने के दौरान यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। इस बैठक में रेल राज्य मंत्री V. Somanna और Ravneet Singh Bittu भी मौजूद थे।
भारतीय रेलवे की मौजूदा आरक्षण प्रणाली वर्ष 1986 में शुरू हुई थी। यह वह दौर था जब भारत में इंटरनेट, मोबाइल फोन और यूपीआई जैसी सुविधाएं मौजूद नहीं थीं। समय-समय पर इसमें छोटे बदलाव किए गए, लेकिन इसकी मूल संरचना लगभग वही बनी रही। अब बढ़ती डिजिटल मांग और यात्रियों की संख्या को देखते हुए रेलवे इसे आधुनिक तकनीक से लैस नई प्रणाली में बदलने जा रहा है।
रेलवे ने वर्ष 2002 में इंटरनेट आधारित टिकट बुकिंग की शुरुआत की थी। आज स्थिति यह है कि देश में लगभग 88 प्रतिशत ट्रेन टिकटों की मांग ऑनलाइन माध्यमों से पूरी हो रही है। रेलवे के अनुसार अब अधिकांश यात्री टिकट काउंटर के बजाय मोबाइल ऐप और वेबसाइट के जरिए टिकट बुक करना पसंद करते हैं।
रेलवे के डिजिटल अभियान के तहत जुलाई 2025 में लॉन्च किया गया RailOne तेजी से लोकप्रिय हुआ है। एक साल से भी कम समय में इस ऐप को 3.5 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। इनमें लगभग 3.16 करोड़ डाउनलोड एंड्रॉयड डिवाइस पर और करीब 33 लाख डाउनलोड एप्पल डिवाइस पर हुए हैं।
रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक प्रतिदिन करीब 9.29 लाख टिकट ऐप के माध्यम से बुक किए जाते हैं। इनमें 7.2 लाख अनारक्षित टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट शामिल हैं, जबकि लगभग 2.09 लाख आरक्षित टिकट होते हैं।
नई टिकटिंग प्रणाली लागू होने के बाद यात्रियों को तेज बुकिंग, बेहतर सर्वर क्षमता और अधिक सुगम डिजिटल सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।