

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कभी वह स्कूल जाती थी, सपने देखती थी और भविष्य की योजनाएं बनाती थी। लेकिन एक दिन वह अचानक गायब हो गई। न कोई सुसाइड नोट, न कोई ठोस सुराग। मामला दर्ज हुआ, जांच चली, लेकिन सवाल आज भी जस का तस है—आखिर 'सुष्मिता' कहां गई? यह कहानी है पश्चिम मिदनापुर के खड़गपुर इलाके की, जहां एक साधारण परिवार की बेटी के लापता होने की घटना ने पुलिस, समाज और सिस्टम—तीनों को कटघरे में खड़ा कर दिया।
परीक्षा के बाद बदला व्यवहार : सुष्मिता हाल ही में स्कूल की परीक्षा देकर लौटी थी। परिणाम को लेकर वह चिंतित थी, लेकिन परिवार का कहना है कि ऐसा कोई संकेत नहीं था जिससे अंदाजा लगाया जा सके कि वह घर छोड़ देगी। परीक्षा के कुछ ही दिनों बाद वह स्कूल जाने के लिए घर से निकली और फिर कभी नहीं लौटी।
मोबाइल, बाइक और एक अजनबी : जांच में सामने आया कि एक युवक मोटरसाइकिल पर उसे कहीं ले जाता हुआ देखा गया था। मोबाइल फोन भी अचानक बंद हो गया। कॉल डिटेल्स खंगाली गईं, कई नंबर सामने आए, लेकिन कोई ठोस कड़ी हाथ नहीं लगी।
पुलिस जांच और सवाल : परिवार का आरोप है कि शुरुआती जांच में लापरवाही बरती गई। गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज तो हुई, लेकिन समय रहते तकनीकी साक्ष्यों और संभावित ठिकानों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कई बार थाने के चक्कर काटने के बावजूद परिवार को सिर्फ़ आश्वासन ही मिला।
शादी या साज़िश? : कुछ सुरागों में यह भी दावा किया गया कि सुष्मिता ने कहीं शादी कर ली है, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। परिवार इस दावे को सिरे से खारिज करता है और कहता है कि यदि ऐसा होता तो वह कभी न कभी संपर्क जरूर करती।
‘हैप्पी न्यू ईयर’ बना दर्दनाक याद : ने साल की शुरुआत परिवार के लिए खुशी नहीं, बल्कि इंतजार और पीड़ा लेकर आई। हर गुजरता दिन उम्मीद को कमजोर करता गया। मां-बाप आज भी दरवाजे की ओर देखते हैं—शायद बेटी लौट आए।
अब भी अधूरी फाइल : पुलिस रिकॉर्ड में यह मामला अब भी “जांचाधीन” है। कोई गिरफ्तारी नहीं, कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं। सुष्मिता की फाइल बंद नहीं हुई है लेकिन समय के साथ धुंधली जरूर पड़ती जा रही है।
सवाल अब भी कायम है—
क्या सुष्मिता जिंदा है?
क्या वह किसी दबाव में है?
या फिर सच किसी ऐसी परत में छिपा है, जिसे अब तक कोई खोल नहीं पाया?
यह सिर्फ़ एक गुमशुदगी का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की परीक्षा भी है। (इसकी जांच अधिकारी आईपीएस अधिकारी शुखेंदु हीरा है जो उस समय खड़गपुर के अधिकारी थे)