

कोलकाता : श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता ने शनिवार को कोलकाता पुलिस और कोलकाता नगर निगम के सहयोग से हुगली नदी के किनारे स्थित ऐतिहासिक घाटों के व्यापक पुनरुद्धार को तेज़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण स्टेकहोल्डर्स मीटिंग की। बैठक की अध्यक्षता पोर्ट के चेयरमैन रथेंद्र रमन ने की। बैठक में कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज कुमार वर्मा, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त-I देवेंद्र प्रकाश सिंह, संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) रूपेश कुमार, डीसी (पोर्ट डिवीजन) हरिकृष्ण पाई, कोलकाता नगर निगम के तकनीकी सलाहकार पी. के. धुआ, पर्यावरण एवं हेरिटेज निदेशक पार्थ सारथी सामंत, पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के प्रतिनिधि समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। पोर्ट के उपाध्यक्ष सम्राट राही और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
बैठक में विभिन्न संगठनों द्वारा घाटों के पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण को लेकर अपनी विस्तृत योजनाएं प्रस्तुत की गयीं :
अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड ने कुम्हारटोली घाट से चंपातला घाट तक के पूरे रिवरफ्रंट क्षेत्र के सौंदर्यीकरण में रुचि व्यक्त की। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) को बागबाजार मायेर घाट और सुरिनाम घाट के सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी दी गई। निमतला इमर्शन घाट को पीएस ग्रुप ने अपनाया है। छोटेलाल घाट को आईएचसीएल ग्रुप (ताज होटल्स) द्वारा पुनर्जीवित कर मनोरंजन और रिक्रिएशन जोन में तब्दील करने का प्रस्ताव है। शहर के दक्षिण में स्थित दहीघाट का विकास टीएनएस लॉजी पार्क प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। इन परियोजनाओं को लेकर पोर्ट पहले ही एमओयू पर हस्ताक्षर कर चुका है। फिलहाल सभी योजनाएं डिजाइन स्टेज में हैं।
‘घाटों का लोगों के जीवन में गहरा महत्व’
एसएमपी कोलकाता के चेयरमैन रथेंद्र रमन ने कहा, ‘कोलकाता के घाट हमारी धरोहर और दैनिक जीवन से गहराई से जुड़े हैं। यह सहयोगात्मक संवाद इस बात को सुनिश्चित करता है कि पुनर्विकास कार्य समावेशी, टिकाऊ और परंपरा के प्रति सम्मानजनक हो। आज की बैठक ने सभी प्रयासों और जिम्मेदारियों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।’ इस अवसर पर कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज कुमार वर्मा ने कहा, ‘कोलकाता के घाट केवल सुंदर जलतट ही नहीं, बल्कि पवित्र स्थल हैं, जिनका शहरवासियों के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जीवन में गहरा महत्व है। किसी भी पुनर्निर्माण कार्य को पूरी जिम्मेदारी के साथ और सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए ही आगे बढ़ाना होगा।’
गौरतलब है कि कोलकाता के घाट लंबे समय से बंगाल की संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर सामाजिक गतिविधियों तक, इन घाटों का विशेष महत्व रहा है। हालांकि प्रदूषण और उपेक्षा के कारण पिछले कुछ दशकों में इनकी चमक फीकी पड़ गई थी। अब इस पहल के जरिये घाटों को पुनः जीवन और आकर्षण लौटाने की योजना है, जिससे वे न सिर्फ नागरिकों के लिए बल्कि पर्यटकों के लिए भी मनोरंजन और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकें।