डबल-इंजन बूस्ट: पूर्व रेलवे की अटकी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

पूर्व सरकार पर सहयोग नहीं करने का आरोप रेलवे ने कहा : अब तेजी से पूरा होगा बुनियादी ढांचा विकास
डबल-इंजन बूस्ट: पूर्व रेलवे की अटकी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य और केंद्र में एक ही दल की सरकार बनने के बाद पूर्व रेलवे की लंबे समय से अटकी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पिछली राज्य सरकार के सहयोग की कमी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं वर्षों तक रुकी रहीं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और रेल संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई। रेलवे के अनुसार, हावड़ा स्टेशन के पास स्थित बनारस और चांदमारी रोड ओवर ब्रिज सबसे चिंताजनक उदाहरण हैं। तकनीकी जांच में इन पुलों की स्थिति बेहद खराब पाई गई थी और रेलवे ने कई बार चेतावनी जारी कर इन्हें सड़क और रेल यातायात दोनों के लिए खतरनाक बताया था। 10 फरवरी 2026 को हुई उच्च स्तरीय बैठक में राज्य सरकार ने एक सप्ताह के भीतर ट्रैफिक ब्लॉक देने का आश्वासन दिया था ताकि मरम्मत कार्य शुरू हो सके, लेकिन रेलवे का आरोप है कि यह वादा पूरा नहीं किया गया। इस दौरान चांदमारी पुल से टूटे हिस्सों के गिरने और लोगों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आईं।पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर ने इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार राज्य प्रशासन से संपर्क बनाए रखा। रेलवे का कहना है कि इन परियोजनाओं की 100 प्रतिशत फंडिंग रेलवे द्वारा की जा रही है और राज्य सरकार से किसी वित्तीय सहयोग की आवश्यकता नहीं थी। इसके बावजूद मॉनसून से पहले कार्य शुरू करने की अपीलों को नजरअंदाज किया गया। रेलवे सूत्रों के मुताबिक, नैहाटी-रानाघाट और रानाघाट-कृष्णानगर तीसरी लाइन परियोजनाएं भी भूमि मानचित्रों और प्रशासनिक स्वीकृतियों को लेकर लंबे समय से अटकी हुई हैं। वहीं, पांच वर्ष पहले विशेष रेलवे परियोजना घोषित की गई साईंथिया बायपास योजना भी अब तक भूमि हस्तांतरण और मुआवजा विवाद के कारण शुरू नहीं हो सकी है। इसके अलावा चंदनपुर-शक्तिगढ़ चौथी लाइन, मुरारई-बरहरवा तीसरी लाइन तथा डानकुनि-बाल्टिकुड़ी तीसरी एवं चौथी लाइन परियोजनाओं में भी प्रशासनिक मंजूरी की प्रक्रिया लंबित रही। अब रेलवे को उम्मीद है कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय से इन परियोजनाओं में तेजी आएगी। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया तेज होने से लंबे समय से रुकी परियोजनाओं को पूरा किया जा सकेगा। विशेष रूप से बनारस पुल के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता देने की तैयारी है, जिसके लिए करीब चार महीने का निर्बाध कार्य आवश्यक बताया गया है।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि यात्रियों और आम लोगों की सुरक्षा रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक बाधाएं हटने के बाद अब रेलवे लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि पश्चिम बंगाल को सुरक्षित, आधुनिक और विश्वस्तरीय रेलवे बुनियादी ढांचा मिल सके।

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