हमें अपने क्राफ्ट के प्रति ईमानदार रहना चाहिए

फिल्म “धुरंधर 2” की सफलता के बाद विक्रम भांबरी (शकील कमांडो) और रजत अरोरा (मुक्का) से खास बातचीत
धुरंधर 2
रजत अरोरा और विक्रम भांबरी इंटरव्यूलिपिका वर्मा
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प्रश्न : “धुरंधर 2” की शानदार सफलता के बाद आप दोनों को कैसा लग रहा है?

विक्रम भांबरी : बहुत अच्छा लग रहा है। फिल्म की कामयाबी ने हमें इंडस्ट्री और दर्शकों के बीच पहचान दिलाई है। अब अलग-अलग प्रोडक्शन हाउस से कॉल्स आ रहे हैं।

रजत अरोरा : बिल्कुल, इस फिल्म ने हमें न सिर्फ अच्छा पे-पैकेज दिया बल्कि पहचान भी दिलाई। अब ऐसा लग रहा है कि मेहनत रंग ला रही है।

प्रश्न : फिल्म में आपके किरदारों के नाम जैसे ‘मुक्का’ और ‘शकील कमांडो’ कैसे पड़े?

रजत अरोरा : दरअसल, गैंग में हर नाम के पीछे एक कहानी है। पहले लोग एक-दूसरे को चिढ़ाने के लिए नाम रख देते थे। जैसे एक किरदार है ‘स्याही’, उसके चेहरे पर दाग थे, इसलिए उसका नाम स्याही पड़ गया। ‘मुक्का’ शायद इसलिए पड़ा क्योंकि उसने बहुत मुक्के खाए होंगे या बहुत मारे होंगे। ऐसे ही मज़ाक-मजाक में नाम पड़ जाते थे।

विक्रम भांबरी : जहां तक ‘शकील कमांडो’ की बात है, वो थोड़ा सीरियस किस्म का किरदार है, इसलिए उसका नाम भी उसी अंदाज़ का रखा गया।

कभी नहीं सोचा था कि एक्टिंग में आऊंगा। 2014 से मुंबई में हूं। 2019 में जिम के कुछ दोस्तों ने कहा कि मेरी हाइट, फिजीक और आवाज अच्छी है, तो मुझे कैमरे के सामने ट्राई करना चाहिए।

प्रश्न : इंडस्ट्री में आपका सफर कितना मुश्किल रहा?

विक्रम भांबरी : सच कहूं तो मैं एक कॉरपोरेट बैकग्राउंड से हूं। मैंने एक आईटी कंपनी में काम किया है। कभी नहीं सोचा था कि एक्टिंग में आऊंगा। 2014 से मुंबई में हूं। 2019 में जिम के कुछ दोस्तों ने कहा कि मेरी हाइट, फिजीक और आवाज अच्छी है, तो मुझे कैमरे के सामने ट्राई करना चाहिए। मैंने थिएटर जॉइन किया और छोटे-छोटे रोल किए । ज़ी5 की ‘इश्क आज कल’ और ‘ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड’ में काम मिला। फिर ऑडिशन देते-देते मुझे ‘धुरंधर’ मिल गई।

रजत अरोरा : मैं हमेशा से स्टेज आर्टिस्ट रहा हूं। मुझे मंच पर परफॉर्म करना पसंद था। कभी दर्शक बनकर बैठना अच्छा नहीं लगा। सिंगिंग, एंकरिंग, डांस या नाटक—मुझे मंच से प्यार था। मुझे ‘कबीर सिंह’ में मुकेश छाबड़ा जी के जरिए काम मिला। मैंने एक शॉर्ट फिल्म ‘पल्स’ की, जिसके लिए कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। वहां से मेरा एक्टिंग के प्रति जुनून और बढ़ा।

महंगाई के दौर में सर्वाइव करना आसान नहीं है। पे बहुत ज्यादा नहीं होता, चाहे प्रोजेक्ट बड़ा ही क्यों न हो। लेकिन असली बात है ‘स्टैम्प’ मिलना-बॉलीवुड में एंट्री मिलना। अभी मुझे इंडस्ट्री का बिज़नेस सीखना है-कब हां कहना है, कब ना । स्ट्रगल के समय पैसे नहीं, विजिबिलिटी ज्यादा मायने रखती है।

प्रश्न : क्या “धुरंधर” के बाद आपको ज्यादा ऑफर्स मिल रहे हैं? क्या इतनी कमाई हो जाती है कि घर चल सके?

विक्रम भांबरी : उम्मीद है कि इस फिल्म से और काम मिलेगा। लेकिन एक प्रोजेक्ट खत्म होते ही फिर से ऑडिशन और नेटवर्किंग शुरू हो जाती है। यही एक्टर की जिंदगी है।

महंगाई के दौर में सर्वाइव करना आसान नहीं है। पे बहुत ज्यादा नहीं होता, चाहे प्रोजेक्ट बड़ा ही क्यों न हो। लेकिन असली बात है ‘स्टैम्प’ मिलना-बॉलीवुड में एंट्री मिलना। अभी मुझे इंडस्ट्री का बिज़नेस सीखना है-कब हां कहना है, कब ना । स्ट्रगल के समय पैसे नहीं, विजिबिलिटी ज्यादा मायने रखती है।

रजत अरोरा : अगर आप सिर्फ पैसे के लिए सोचते हैं, तो आप सच्चे कलाकार नहीं बन सकते। थिएटर में टैलेंट बहुत है, लेकिन पे कम होता है। लोग जुनून के लिए काम करते हैं। हमें अपने क्राफ्ट के प्रति ईमानदार रहना चाहिए। पैसे की उम्मीद कम रखो, अगर मिल जाए तो बोनस समझो। फोकस अपने काम और ग्रोथ पर होना चाहिए।

प्रश्न : डायरेक्टर-प्रोड्यूसर आदित्य धर के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

विक्रम और रजत (एक साथ) : हमने बहुत कुछ सीखा। हमारे क्राफ्ट और स्किल्स में काफी सुधार हुआ है। आदित्य सर का शुक्रिया कि उन्होंने हमें अच्छा पे-पैकेज दिया और इतना बड़ा मौका दिया।

प्रश्न : आगे किस तरह के रोल करना चाहेंगे?

विक्रम भांबरी : हम वर्सेटाइल रोल करना चाहते हैं। छोटे या बड़े रोल से फर्क नहीं पड़ता, लेकिन स्क्रीन पर विजिबिलिटी जरूरी है।

रजत अरोरा : हम टाइपकास्ट नहीं होना चाहते। अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर खुद को साबित करना चाहते हैं। यही असली ग्रोथ है। - लिपिका वर्मा

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