

हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार अक्षय कुमार एक बार फिर अपनी बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' के साथ दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार हैं। इस मल्टीस्टारर फिल्म में वह एक दिलचस्प भोजपुरी किरदार निभाते नजर आएंगे। अपने चार दशक लंबे करियर में एक्शन, कॉमेडी और रोमांस जैसे हर रंग को सफलतापूर्वक पर्दे पर उतारने वाले अक्षय आज भी नई चुनौतियों को लेकर उतने ही उत्साहित हैं। इस खास बातचीत में अक्षय कुमार ने कॉमेडी, मल्टीस्टारर फिल्मों, इंडस्ट्री में बदलते प्रोफेशनलिज्म, फिल्मों में बढ़ती हिंसा और सफलता के अपने मंत्र पर खुलकर बात की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश-
आप फिल्म में एक भोजपुरी किरदार निभा रहे हैं। भोजपुरी भाषा सीखना कितना आसान या मुश्किल था?
अक्षय कुमार : यह तो बहुत आसान था। भोजपुरी तो हॉलीवुड से भी बेहतर है। (हंसते हुए) मैं एक भोजपुरी अभिनेता का किरदार निभा रहा हूं और भाषा को लेकर कोई परेशानी नहीं हुई क्योंकि यह हिंदी के बहुत करीब है।
मैंने जानबूझकर अलग-अलग जॉनर में काम करना चुना ताकि खुद को लगातार खोजता रहूं
आपने एक्शन, कॉमेडी, रोमांस और गंभीर किरदार सभी निभाए हैं। आज किस तरह के रोल करना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं?
अक्षय कुमार : मुझे हर तरह के किरदार पसंद हैं। जब मैंने इंडस्ट्री में कदम रखा था तो लोग मुझे सिर्फ एक्शन हीरो के रूप में देखते थे। उसके बाद मैंने जानबूझकर अलग-अलग जॉनर में काम करना चुना ताकि खुद को लगातार खोजता रहूं। मैंने कॉमेडी, रोमांस, सोशल ड्रामा और एक्शन फिल्में की हैं। एक अभिनेता के तौर पर मुझे हर तरह की चुनौती और विविधता पसंद है।
कॉमेडी को सबसे कठिन विधा माना जाता है। आपको इसमें इतना आनंद क्यों आता है?
अक्षय कुमार : कॉमेडी निश्चित रूप से सबसे मुश्किल जॉनर है। लोगों को भावुक करना अपेक्षाकृत आसान होता है क्योंकि उसमें परिस्थितियां और बैकग्राउंड म्यूजिक मदद करते हैं। लेकिन किसी को दिल से हंसाना बहुत मेहनत और सटीकता मांगता है। कॉमेडी को अक्सर वह सम्मान नहीं मिलता जिसकी वह हकदार है। शायद यही वजह है कि मुझे कॉमेडी करना पसंद है और मैं बार-बार इस शैली में लौटता हूं।
सलमान खान ने हाल ही में कहा कि कई युवा कलाकार असुरक्षा के कारण मल्टीस्टारर फिल्में करने से हिचकते हैं। इस पर आपका क्या कहना है?
अक्षय कुमार : हर किसी की अपनी सोच होती है। कुछ लोग सोलो फिल्में करना पसंद करते हैं तो कुछ मल्टीस्टारर फिल्में। सफलता का कोई तय फॉर्मूला नहीं है। फिल्म उसकी कहानी और प्रस्तुति की वजह से चलती है, सिर्फ इस वजह से नहीं कि वह सोलो है या मल्टीस्टारर।
इंडस्ट्री में प्रोफेशनलिज्म में क्या बदलाव आया है ? आज की पीढ़ी के वर्क एथिक्स को आप कैसे देखते हैं ?
अक्षय कुमार : तकनीक, काम करने के तरीके और फिल्मों का पैमाना बहुत बदल गया है। लेकिन मूल बातें वही हैं-कड़ी मेहनत, अनुशासन और अपने काम के प्रति सम्मान। कैमरा शूटिंग का तरीका भी मूल रूप से वही है। हर पीढ़ी का काम करने का अपना तरीका होता है। पहले फिल्म निर्माण और आपसी व्यवहार का अंदाज अलग था, आज प्रोफेशनलिज्म विकसित हुआ है, लेकिन आखिर में टीमवर्क और समर्पण ही सबसे ज्यादा मायने रखते हैं।
फिल्मों में बढ़ती हिंसा और क्रूरता को लेकर काफी चर्चा हो रही है। आपकी राय क्या है?
अक्षय कुमार : मुझे ऐसी फिल्में पसंद हैं जो बिना अत्यधिक हिंसा के मनोरंजन करें। 'वेलकम टू द जंगल' एक साफ-सुथरी फिल्म है, बहुत ज्यादा हिंसक नहीं है। कुछ कहानियों, जैसे युद्ध या सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्मों में यथार्थ और तीव्रता की जरूरत होती है। सब कुछ विषय पर निर्भर करता है। यह एक फैमिली एंटरटेनर है, जिसे दादी और पोता भी साथ बैठकर देख सकते हैं।
सुनील शेट्टी और आपकी जोड़ी को दर्शक बेहद पसंद करते हैं। दोबारा साथ आकर कैसा लग रहा है?
अक्षय कुमार : हमने साथ में कई सफल फिल्में की हैं और हमारी केमिस्ट्री आज भी वैसी ही है। उम्मीद है कि दर्शक इस बार भी हमारी जोड़ी को उतना ही पसंद करेंगे जितना पहले करते आए हैं। एक जोड़ी के रूप में हमने ज्यादातर हिट फिल्में दी हैं।
फिल्मों की सफलता को लेकर आपने क्या सीखा है? कौन-से कारक सबसे अहम हैं?
अक्षय कुमार : करियर की शुरुआत में मैंने एक बात सीखी थी—अगर बजट सही है, तो फिल्म आधी हिट पहले ही हो जाती है। हर फिल्म सफल नहीं हो सकती, लेकिन जिम्मेदारी के साथ बनाया गया बजट निर्माता को सुरक्षित रखता है और इंडस्ट्री को स्वस्थ बनाए रखता है। यश चोपड़ा साहब कहा करते थे, "बजट हिट तो फिल्म हिट।" मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि मेरे निर्माता को फायदा हो। लेखक, निर्देशक और निर्माता एक ही सोच पर होने चाहिए। अभिनेता, निर्देशक और निर्माता के बीच स्वस्थ रिश्ता किसी पति-पत्नी के रिश्ते जैसा होता है। कई बार मैं खुद निवेशक के तौर पर भी जुड़ा हूं और एक पैसा तक फीस नहीं ली है। सबसे जरूरी चीज है बजट और कहानी में अनुशासन। फिल्में चलेंगी भी और असफल भी होंगी, लेकिन अगर आप ईमानदारी और जिम्मेदारी से फिल्म बनाते हैं तो सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
आपने अपने लिए पहले ही एक बड़ा मुकाम बना लिया है। अब आगे किस तरह का बेंचमार्क स्थापित करना चाहेंगे?
अक्षय कुमार : बेंचमार्क किरदार, संवाद और कहानी पर निर्भर करता है। 'वेलकम टू द जंगल' कई फिल्मों की परंपरा को आगे बढ़ाती है, लेकिन इसे अलग अंदाज में पेश किया गया है। यह एक आसान, मनोरंजक फिल्म है, कोई आर्ट फिल्म नहीं।
आपने लंबे समय से अपने ट्रेडमार्क "खिलाड़ी" टाइटल वाली फिल्म नहीं की है। अगली "खिलाड़ी" फिल्म कब आएगी?
अक्षय कुमार (मुस्कुराते हुए) : गंभीरता से कहूं तो अगली फिल्म का नाम होगा-"आखिरी खिलाड़ी"।
आपका करियर बहुत लंबा और सफल रहा है। उतार-चढ़ाव के बावजूद आप खुद को जमीन से कैसे जुड़े रखते हैं?
अक्षय कुमार : इसमें कोई रॉकेट साइंस नहीं है। अगर कोई फिल्म नहीं चलती तो आप सिर्फ यह समझ सकते हैं कि गलती कहां हुई और कोशिश कर सकते हैं कि वही गलती दोबारा न हो। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। सबसे जरूरी है लगातार आगे बढ़ते रहना और अपना सिर झुकाकर काम करते रहना।
एक कहावत है, जिस पर मैं विश्वास करता हूं-"जब तूफान आए तो सिर झुकाकर चलो, और जब तूफान गुजर जाए तब भी सिर झुकाकर चलो।" इससे जिंदगी आसान और सुरक्षित हो जाती है।
लिपिका वर्मा