मैंने अब यही रास्ता चुना है और अपनी आखिरी सांस तक इसी पर चलता रहूँगा : Sonu Sood

Interview
सोनू सूद
Published on

मानवता, सिनेमा और एक “पीसमेकर” बनने के सफर पर Sonu Sood से खास बातचीत

कोविड के दौरान जो सफर शुरू हुआ था, वह आज भी जारी है। हर दिन सैकड़ों लोग मेरे घर के बाहर मदद की उम्मीद लेकर आते हैं। सच कहूँ तो वही लोग मुझे हर दिन कुछ नया सिखाते हैं - चाहे किसी की सर्जरी करवानी हो, किसी की पढ़ाई में मदद करनी हो या किसी के लिए नौकरी ढूँढनी हो।

आज आपको यहाँ “पीसमेकर” के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। कोविड के दौरान आप लाखों लोगों के लिए वास्तविक जीवन के हीरो बनकर उभरे। आज जब दुनिया इतनी उथल-पुथल से गुजर रही है, तो आप अपनी भूमिका को कैसे देखते हैं?

Sonu Sood : मैं कभी भी पहले से योजना बनाकर काम नहीं करता। कोविड के दौरान भी मुझे नहीं पता था कि हम लोगों के लिए बसें, फ्लाइट्स या ट्रेनें कैसे अरेंज करेंगे, लेकिन किसी न किसी तरह सब होता चला गया क्योंकि हमने कोशिश करना नहीं छोड़ा। मेरा हमेशा से मानना है कि चाहे आप कितनी भी बार असफल हों, कोशिश करते रहना चाहिए, क्योंकि अंततः जिंदगी कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेती है। कोविड के दौरान जो सफर शुरू हुआ था, वह आज भी जारी है। हर दिन सैकड़ों लोग मेरे घर के बाहर मदद की उम्मीद लेकर आते हैं। सच कहूँ तो वही लोग मुझे हर दिन कुछ नया सिखाते हैं - चाहे किसी की सर्जरी करवानी हो, किसी की पढ़ाई में मदद करनी हो या किसी के लिए नौकरी ढूँढनी हो। मेरा मानना है कि सबसे बड़ी सीख एक अच्छा विद्यार्थी बने रहना है। अगर आप लोगों से सीखने के लिए तैयार हैं, तो जिंदगी आपको हर दिन कुछ न कुछ सार्थक सिखाती रहेगी।

हर रविवार मेरे मुंबई स्थित घर पर मैं लोगों से व्यक्तिगत रूप से मिलता हूँ। सप्ताह के बाकी दिनों में भी लोग मेरे ऑफिस या घर के बाहर इंतजार करते हैं, क्योंकि उनमें से कई लोग यूपी, बिहार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों से मुंबई आते हैं। मैं उनसे यह नहीं कह सकता कि वे एक हफ्ते बाद आएँ, क्योंकि वे पहले ही इतना समय और पैसा खर्च करके यहाँ पहुँचे होते हैं।

आप शिक्षा, मेडिकल सहायता और खासकर लड़कियों की शिक्षा को लेकर लगातार काम कर रहे हैं। साथ ही बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री में आपका सफल अभिनय करियर भी है। आप यह सब कैसे मैनेज करते हैं ?

Sonu Sood : सच कहूँ तो लोगों की मदद करने का कोई तय समय नहीं होता। मैं जब शूटिंग पर होता हूँ, तब भी लोग मेरे पास अपनी समस्याएँ लेकर आ जाते हैं और हम शॉट्स के बीच में ही उनकी मदद करने की कोशिश करते हैं। हर रविवार मेरे मुंबई स्थित घर पर मैं लोगों से व्यक्तिगत रूप से मिलता हूँ। सप्ताह के बाकी दिनों में भी लोग मेरे ऑफिस या घर के बाहर इंतजार करते हैं, क्योंकि उनमें से कई लोग यूपी, बिहार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों से मुंबई आते हैं। मैं उनसे यह नहीं कह सकता कि वे एक हफ्ते बाद आएँ, क्योंकि वे पहले ही इतना समय और पैसा खर्च करके यहाँ पहुँचे होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में मैं देश और विदेश के अनगिनत आम लोगों से जुड़ा हूँ। कई बार किसी इंसान को सिर्फ आपकी बात सुनने और एक सच्चे फोन कॉल की जरूरत होती है। हर मामला सफल नहीं होता, लेकिन कई बार भगवान ऐसा रास्ता बना देते हैं कि आप किसी की जिंदगी बचा पाते हैं या किसी के चेहरे पर मुस्कान ला पाते हैं। वह एहसास अनमोल होता है।

...किसी की जिंदगी बचाना या किसी जरूरतमंद के चेहरे पर खुशी लाना, बॉक्स ऑफिस नंबरों से कहीं ज्यादा बड़ा काम है। फिल्में आती-जाती रहती हैं, लेकिन जो असर आप किसी की जिंदगी पर छोड़ते हैं, वह पीढ़ियों तक कायम रहता है। मैंने अब यही रास्ता चुना है और अपनी आखिरी सांस तक इसी पर चलता रहूँगा।

फिल्म इंडस्ट्री में आपका सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। शुरुआती संघर्षों से लेकर बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के स्टार बनने तक, अब आप मानवता और उम्मीद का प्रतीक बन चुके हैं। इस बदलाव को आप कैसे देखते हैं?

Sonu Sood : इन खूबसूरत शब्दों के लिए धन्यवाद। जब मैंने इंजीनियरिंग पूरी की और मुंबई आया, तब मेरा सपना सिर्फ इतना था कि फिल्मों में अपनी पहचान बनाऊँ ताकि लोग मुझे एक अभिनेता के रूप में जानें। लेकिन बाद में मुझे एहसास हुआ कि किसी की जिंदगी बचाना या किसी जरूरतमंद के चेहरे पर खुशी लाना, बॉक्स ऑफिस नंबरों से कहीं ज्यादा बड़ा काम है। फिल्में आती-जाती रहती हैं, लेकिन जो असर आप किसी की जिंदगी पर छोड़ते हैं, वह पीढ़ियों तक कायम रहता है। मैंने अब यही रास्ता चुना है और अपनी आखिरी सांस तक इसी पर चलता रहूँगा।

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष कर रही है, लेकिन फिर भी कई फिल्मों को सफल बताया जाता है। आपके अनुसार आज के सिनेमा में क्या कमी है ?

Sonu Sood : सबसे जरूरी बात है अच्छा सिनेमा बनाना। आज का दर्शक बहुत जागरूक और समझदार है, इसलिए फिल्मकारों को मजबूत कंटेंट और सही तैयारी पर ध्यान देना होगा। आप बिना समय दिए और बिना मजबूत स्क्रिप्ट के अच्छी फिल्म नहीं बना सकते। दुर्भाग्य से कई बार फिल्में पूरी तैयारी या पूरी स्क्रिप्ट के बिना ही शुरू कर दी जाती हैं। सिनेमा में शुरुआत से ही ईमानदारी और मेहनत की जरूरत होती है।

अब आप Fateh के साथ निर्माता और निर्देशक भी बन चुके हैं। आगे फिल्मी मोर्चे पर क्या नया आने वाला है?

Sonu Sood : हाँ, Fateh के बाद मैं Nandi नाम की एक और फिल्म डायरेक्ट कर रहा हूँ। हम अक्टूबर या नवंबर के आसपास शूटिंग शुरू करने की योजना बना रहे हैं। पिछले चार-पाँच महीनों से इसकी तैयारी चल रही है और मैं इसे लेकर बेहद उत्साहित हूँ। उम्मीद है जल्द ही बॉक्स ऑफिस पर फिर मुलाकात होगी।

आज आप “बिलियनेयर्स फॉर पीस” कॉन्क्लेव में शामिल हो रहे हैं। यह जुड़ाव कैसे हुआ?

Sonu Sood : मेरा मानना है कि भगवान समान सोच वाले लोगों को आपस में जोड़ देते हैं। जब लोग मानवता की मदद और जिंदगी बदलने के इरादे से साथ आते हैं, तो खूबसूरत चीजें जन्म लेती हैं। मुझे लगता है कि यह एक शानदार यात्रा की शुरुआत है।

भारत के किसी भी कोने से अगर किसी महिला को ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी की जरूरत है, तो वह मुंबई आ सकती है और हम उसकी सर्जरी पूरी तरह मुफ्त करवाएँगे।

हाल ही में आप ब्रेस्ट कैंसर मरीजों के लिए भी सराहनीय काम कर रहे हैं। इस बीमारी से लड़ रही महिलाओं को आप क्या संदेश देना चाहेंगे ?

Sonu Sood : करीब साढ़े चार से पाँच साल पहले मुझे पहला ब्रेस्ट कैंसर का मामला मिला था, और तब से अब तक हम लगभग 650 सर्जरी करवा चुके हैं। आज मैं खुलकर यह कहना चाहता हूँ - भारत के किसी भी कोने से अगर किसी महिला को ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी की जरूरत है, तो वह मुंबई आ सकती है और हम उसकी सर्जरी पूरी तरह मुफ्त करवाएँगे। -लिपिका वर्मा

logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in