

बॉलीवुड अभिनेता अभिमन्यु सिंह ने क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज 'इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 2' में अपने अर्धनारीश्वर किरदार और अपने सिनेमाई सफर पर खुलकर बात की-
इंस्पेक्टर अविनाश 2 में आपका किरदार देविका उर्फ अर्धनारीश्वर काफी सराहा जा रहा है। इस प्रतिक्रिया को लेकर आप कैसा महसूस कर रहे हैं?
अभिमन्यु सिंह : मुझे बहुत खुशी और संतोष महसूस हो रहा है कि दर्शकों को यह किरदार इतना पसंद आ रहा है। मैंने इस भूमिका के लिए बहुत मेहनत की थी। हमने इस प्रोजेक्ट की शूटिंग लगभग 3–4 साल पहले की थी। कई बार मन में सवाल आता था कि रिलीज़ में इतनी देर क्यों हो रही है, लेकिन अब जब लोगों का प्यार मिल रहा है तो सारी मेहनत सफल लग रही है।
सीरीज़ में आपका लुक बेहद अलग और चुनौतीपूर्ण है। अर्धनारीश्वर में बदलना कितना मुश्किल था?
अभिमन्यु सिंह : यह मेरे करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रांसफॉर्मेशन्स में से एक था। रोज़ तैयार होने में लगभग ढाई घंटे लगते थे - साड़ी पहनने से लेकर मेकअप, लिपस्टिक, बिंदी और नेल पॉलिश तक सब कुछ करना पड़ता था।
शुरुआत में मुझे बहुत पसीना आता था और साड़ी-पेटीकोट में लंबे समय तक रहना असहज लगता था। लेकिन जैसे-जैसे मैंने खुद को पूरी तरह इस किरदार को सौंप दिया, मेरे अंदर से एक अलग ही व्यक्तित्व निकलकर आया, तभी देविका सच में जीवित हो पाई।
अर्धनारीश्वर का भारतीय पौराणिक परंपरा में गहरा आध्यात्मिक महत्व है। आपके लिए इसका क्या अर्थ है ?
अभिमन्यु सिंह : अर्धनारीश्वर भगवान शिव का एक स्वरूप है और मैं व्यक्तिगत रूप से महादेव का भक्त हूं। अर्धनारीश्वर का अर्थ है स्त्री और पुरुष ऊर्जा का मिलन - आधा पुरुष और आधी स्त्री। जब ये दोनों शक्तियां एक साथ आती हैं, तब पूर्ण शक्ति का निर्माण होता है। यह जीवन में साझेदारी का भी प्रतीक है। पति और पत्नी मिलकर ज्यादा मजबूत बनते हैं। वही संतुलन और पूर्णता अर्धनारीश्वर दर्शाता है।
आपकी पत्नी सरगम सिंह हमेशा आपके साथ खड़ी रही हैं। उनके योगदान के बारे में क्या कहना चाहेंगे ?
अभिमन्यु सिंह : वो मेरी जिंदगी में चट्टान की तरह रही हैं। जब हम मिले थे, तब मैं संघर्ष कर रहा था और इस इंडस्ट्री में सफलता की कोई गारंटी नहीं होती। लेकिन उन्होंने कभी दोबारा सोचा ही नहीं और हमेशा मेरा साथ दिया। जब भी मैं निराश हुआ, उन्होंने मुझे भावनात्मक रूप से संभाला और सही दिशा दिखाई। मैं सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव नहीं हूं, लेकिन वो हमेशा सुनिश्चित करती हैं कि मेरा काम लोगों तक पहुंचे। आज मुझे जो पहचान मिली है, उसमें उनका बहुत बड़ा योगदान है।
इंस्पेक्टर अविनाश 2 में देविका का किरदार कितना महत्वपूर्ण है?
अभिमन्यु सिंह : देविका कहानी का बहुत अहम हिस्सा है। जैसा कहते हैं, जितना मजबूत विलेन होगा, कहानी उतनी ही दमदार बनेगी। देविका कहानी में थ्रिल, अनिश्चितता और तीव्रता लेकर आती है। यह शो भारत के देसी परिवेश और वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है, जो इसे और दिलचस्प बनाता है। आज दर्शक ग्राउंडेड और अलग तरह की कहानियां देखना चाहते हैं, और इंस्पेक्टर अविनाश वही देता है।
आपने पहले भी कई नेगेटिव किरदार निभाए हैं, लेकिन देविका को लेकर शुरुआत में हिचकिचाहट क्यों थी ?
अभिमन्यु सिंह : सच कहूं तो शुरुआत में मैं यह रोल करना ही नहीं चाहता था क्योंकि यह बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण लगा। डायरेक्टर Neeraj Pathak लगातार मुझे मनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मैं करीब तीन महीने तक तैयार नहीं हुआ। एक दिन मोनोज बाजपेई ने हमारी बातचीत सुन ली। मैंने उन्हें बताया कि मुझे साड़ी पहननी पड़ेगी और पूरी तरह बदलना पड़ेगा, इसलिए मैं मना कर रहा हूं। तब उन्होंने कहा, “अगर चुनौतियों से डरते हो तो फिर अभिनेता क्यों बने ?”
उनकी इस बात ने मेरा नजरिया बदल दिया। मैं कहूंगा कि मनोज भाई ने ही मुझे यह किरदार स्वीकार करने की प्रेरणा दी।
दोस्तों और दर्शकों से भी शानदार प्रतिक्रियाएं मिलीं
इस किरदार के लिए आपको सबसे बेहतरीन तारीफ कौन-सी मिली?
अभिमन्यु सिंह : मेरी पत्नी ने कहा कि यह मेरे करियर की सबसे मुश्किल और प्रभावशाली परफॉर्मेंस में से एक है। उन्होंने कहा कि मैं इस किरदार में बेहद खूबसूरत लग रहा था, और यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है। दोस्तों और दर्शकों से भी शानदार प्रतिक्रियाएं मिलीं, जो बहुत संतोष देती हैं क्योंकि इसमें बहुत मेहनत लगी थी।
आपने हिंदी और तेलुगु दोनों इंडस्ट्री में काफी काम किया है। दोनों में क्या अंतर महसूस होता है ?
अभिमन्यु सिंह : ईमानदारी से कहूं तो सिनेमा हर जगह सिनेमा ही होता है। भाषा बदलती है, लेकिन जुनून और मेहनत वही रहती है। मुझे साउथ और हिंदी इंडस्ट्री में काम करने में कोई बड़ा फर्क नहीं लगता। फिलहाल मैं नंदामुरी बालकृष्ण के साथ एक तेलुगु प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा हूं और अनुभव बहुत शानदार है।
आपको क्या लगता है कि आजकल कई हिंदी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष क्यों कर रही हैं ?
अभिमन्यु सिंह : मुझे लगता है कि दर्शक कई फिल्मों से जुड़ नहीं पा रहे क्योंकि उनमें मिट्टी की खुशबू और जड़ें गायब हो गई हैं। कई फिल्में पश्चिमी प्रभाव और भारतीय पहचान के बीच उलझ जाती हैं और अपनी स्पष्टता खो देती हैं। दूसरी बड़ी समस्या टिकट की कीमतें हैं। फिल्म देखना आम दर्शकों, छात्रों और परिवारों के लिए महंगा हो गया है। अगर टिकट सस्ते हों, तो ज्यादा लोग थिएटर लौटेंगे।
नए कलाकारों को आप क्या सलाह देना चाहेंगे?
अभिमन्यु सिंह : सबसे जरूरी है कि अपने हुनर पर लगातार काम करते रहें। मैं खुद थिएटर से आया हूं। मैंने लगभग आठ साल तक कड़ी ट्रेनिंग ली और पृथ्वी थिएटर में अपने गुरु मकरंद देशपांडे के साथ शुरुआत की। थिएटर ने मुझे अनुशासन, आवाज़ पर नियंत्रण, बॉडी लैंग्वेज और भावनात्मक गहराई सिखाई। मेरा मानना है कि आपका काम ही अंत में आपकी पहचान बनता है।
अब आप प्रोडक्शन और निर्देशन में भी कदम रख रहे हैं। इस सफर के बारे में बताइए।
अभिमन्यु सिंह : जी हां, मैंने और मेरी पत्नी ने अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस शुरू किया है और मैं निर्देशन की तैयारी भी कर रहा हूं। इसकी प्रेरणा मुझे पृथ्वीराज सुकुमारन के साथ एमपुराण में काम करते हुए मिली। उन्हें अभिनय और निर्देशन दोनों को इतनी सहजता से संभालते देखकर मैं काफी प्रेरित हुआ।
मैंने एक कहानी लिखी थी और पहले सोच रहा था कि कोई दूसरा इसे निर्देशित करेगा। लेकिन मेरे दोस्त और प्रोड्यूसर नीरज भाटिया ने कहा कि जिस तरह मैं कहानी को देख और समझा रहा हूं, शायद मैं ही इसे सबसे बेहतर तरीके से पर्दे पर ला सकता हूं।
क्या आप इस फिल्म में अभिनय भी करेंगे?
अभिमन्यु सिंह : देखते हैं। समय तय करेगा। फिलहाल मेरा पूरा ध्यान फिल्म को सही तरीके से बनाने पर है।
फिल्म का जॉनर क्या होगा?
अभिमन्यु सिंह : यह एक थ्रिलर फिल्म है जिसमें सटायर के मजबूत तत्व होंगे। मुझे हमेशा से व्यंग्य पसंद रहा है, और यह कहानी सस्पेंस के साथ समाज पर तीखी टिप्पणियां भी करती है।
प्रोडक्शन अक्सर काफी तनावपूर्ण होता है। निर्माता और निर्देशक के रूप में आपका अनुभव कैसा रहा?
अभिमन्यु सिंह : यह मेरे लिए बहुत बड़ा सीखने का अनुभव रहा है। शुरुआत में हमें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। मैंने प्रोडक्शन टीम के लिए कुछ गलत लोगों का चुनाव कर लिया था और बाद में उन्हें बदलना पड़ा क्योंकि उनका काम सही नहीं था।
मुझे लगता है कि इंडस्ट्री में कई निर्माता और फाइनेंसर गैर-पेशेवर लोगों की वजह से परेशान होते हैं। कई लोग लालच में आकर पूरे सिस्टम को नुकसान पहुंचा देते हैं।
आपकी पत्नी सरगम सिंह प्रोडक्शन में भी काफी सक्रिय रही हैं। उनकी भूमिका कितनी अहम रही ?
अभिमन्यु सिंह : उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। एक समय ऐसा भी आया जब हमें लगा कि शूटिंग पूरी तरह बंद हो जाएगी। सेट पर लगभग 150–250 लोग मौजूद थे और अचानक कई समस्याएं खड़ी हो गईं। तब सरगम ने स्थिति संभाली। उन्होंने बहुत शांत और व्यावहारिक तरीके से प्रोडक्शन मैनेजमेंट समझा और एक-एक समस्या हल की। उसके बाद चीजें धीरे-धीरे आसान होती गईं। महादेव की कृपा से हम तय समय पर शूट पूरा कर पाए और वही गुणवत्ता हासिल कर सके जो हम चाहते थे।
फिल्म का कितना काम पूरा हो चुका है?
अभिमन्यु सिंह : करीब 50% फिल्म पूरी हो चुकी है। फिलहाल मेरा पूरा ध्यान एक अच्छी फिल्म बनाने पर है। बाकी जानकारियां सही समय पर सामने आएंगी।
क्या आप फिल्म की स्टारकास्ट का खुलासा कर सकते हैं?
अभिमन्यु सिंह : अभी नहीं। आधिकारिक घोषणाएं जल्द ही नीरज भाटिया और उनकी टीम की तरफ से की जाएंगी।
इंस्पेक्टर अविनाश 2 को लेकर दर्शकों के लिए कोई संदेश?
अभिमन्यु सिंह : मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि इंस्पेक्टर अविनाश जरूर देखिए और हमारी बनाई दुनिया का आनंद लीजिए। यह भारत की मिट्टी और असली घटनाओं से प्रेरित कहानी है, जिससे दर्शक जरूर जुड़ेंगे।
इंटरव्यू खत्म करने से पहले, सूर्यवंशी में अक्षय कुमार के साथ आपके किरदार का जिक्र करना जरूरी है। दर्शकों ने उस भूमिका को भी काफी पसंद किया।
अभिमन्यु सिंह : बहुत-बहुत धन्यवाद। जब दर्शक आपके अलग-अलग किरदारों और फिल्मों को याद रखते हैं और सराहते हैं, तो बहुत अच्छा लगता है। -लिपिका वर्मा