सूर्यवंशी को लेकर जल्दबाजी नहीं : मोर्कल

टीम प्रबंधन का संजू-अभिषेक पर भरोसा बरकरार, वैभव सूर्यवंशी को मौका देने से पहले स्थिर संयोजन पर जोर
फाइल फोटो
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मैनचेस्टर : भारत के गेंदबाजी कोच मोर्नी मोर्कल ने शुक्रवार को संकेत दिया कि टीम प्रबंधन 15 वर्षीय प्रतिभाशाली बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के टीम के दरवाजे पर दस्तक देने के बावजूद सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा को आसानी से बाहर नहीं करेगा। इंग्लैंड दौरे पर जारी T-20 सीरीज में अभिषेक ने पिछली तीन पारियों में एक अर्द्धशतक बनाया और 49 रन की पारी खेली है जबकि सैमसन ने पांच, शून्य और एक रन बनाकर निराशाजनक प्रदर्शन किया है। दूसरे T-20 मुकाबले की पूर्व संध्या पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में मोर्कल ने कहा, ‘हमें इस बात का सम्मान करना चाहिए कि हमारे पास अभिषेक शर्मा के रूप में T-20 क्रिकेट का नंबर एक बल्लेबाज है।

वहीं संजू विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘संजू का IPL में भी प्रदर्शन शानदार रहा था। ऐसे में कोचिंग स्टाफ के तौर पर खिलाड़ियों पर भरोसा जताना और उनका समर्थन करना उचित है। हां, एक युवा खिलाड़ी दरवाजे पर दस्तक दे रहा है और यह उत्साहजनक है।’ मोर्कल ने कहा, ‘लेकिन मेरा मानना है कि केवल इन दोनों खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी टीम के लिए यह अच्छा संकेत है कि हम अपने खिलाड़ियों के साथ खड़े हैं और उन पर भरोसा करते हैं।’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीम प्रबंधन बल्लेबाजों के बल्लेबाजी क्रम में अनावश्यक बदलाव करने के पक्ष में नहीं है, खासकर तब जब वे पहले उसी क्रम में अच्छा प्रदर्शन कर चुके हों।

उन्होंने कहा, ‘आखिरकार सबसे महत्वपूर्ण बात प्रदर्शन करना है। लेकिन हम केवल बदलाव के लिए खिलाड़ियों को उनकी स्वाभाविक बल्लेबाजी स्थिति से हटाना नहीं चाहते। इसलिए यह इतना आसान नहीं है कि कह दें, ‘चलिए, सूर्यवंशी को खिला देते हैं’।’ मोर्कल ने कहा, ‘हमें उन खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखना होगा जिन्होंने विश्व कप जीते हैं और कठिन परिस्थितियों में टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया है। इसके बाद ही हम परिस्थितियों के अनुसार अपने शीर्ष बल्लेबाजी क्रम को और मजबूत बनाने की दिशा में काम करेंगे।’ हालांकि मोर्कल ने वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय पदार्पण की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई, लेकिन उन्होंने कहा कि 15 वर्षीय बल्लेबाज ने भारतीय ड्रेसिंग रूम के माहौल और नेट्स की दिनचर्या में खुद को बहुत अच्छी तरह ढाल लिया है।

उन्होंने कहा, ‘उसने टीम में बहुत अच्छी तरह खुद को शामिल किया है। अगर आप खिलाड़ियों के इंस्टाग्राम देखें तो उसके साथ काफी तस्वीरें साझा की जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 15 साल की उम्र में नेट्स पर अभ्यास करना किसी के लिए भी दबाव वाला अनुभव हो सकता है।’ मोर्कल ने कहा, ‘लेकिन जितने भी नेट सत्र हुए हैं, उनमें उसने काफी प्रभावित किया है। हम सभी उत्साहित हैं कि मौका मिलने पर वह कैसा प्रदर्शन करेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि मौका मिलने पर वह पूरी तरह तैयार रहेगा। टीम में घुलने-मिलने की उसकी प्रक्रिया भी बेहद सहज रही है।’ दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज मोर्कल ने एक अन्य युवा खिलाड़ी, तेज गेंदबाज प्रिंस यादव की भी जमकर तारीफ की।

प्रिंस अब तक तीन अंतरराष्ट्रीय मैचों में छह विकेट ले चुके हैं। मोर्कल ने कहा, ‘मुझे लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ काम करते समय प्रिंस को गेंदबाजी करते हुए देखने का अवसर मिला था। उस समय वह नेट गेंदबाज थे और तभी से उन्हें बेहद प्रतिभाशाली गेंदबाज माना जाता था। सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली बात यह है कि वह दबाव में भी बेहद शांत रहते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘वह हमेशा अपने खेल में सुधार के तरीके तलाशते रहते हैं। लेकिन आखिरकार सब कुछ सही कार्यान्वयन पर निर्भर करता है। डेथ ओवरों और मध्य के ओवरों में जिस तरह वह मैच की परिस्थितियों को समझते हैं, दबाव में फैसले लेते हैं और उन्हें अमल में लाते हैं, वह बेहद प्रभावशाली है।’ मोर्कल ने यह भी कहा कि चोट से वापसी के बाद हर्षित राणा को शिद्दत से गेंदबाजी करते देखना काफी प्रभावित करने वाला रहा।

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