'अय्यर और सॉल्ट को छोड़ना KKR की बड़ी गलती'

अय्यर केकेआर छोड़कर पंजाब किंग्स में शामिल हो गए जिसकी कप्तानी करते हुए उन्होंने पिछले सत्र में करीब एक दशक बाद टीम को पहली बार आईपीएल फाइनल में पहुंचाया
फाइल फोटो
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मुंबई : महान क्रिकेटर अनिल कुंबले ने कहा कि कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने 2024 में खिताब जीतने के बाद श्रेयस अय्यर और फिल सॉल्ट को जाने देकर गलत फैसला किया। उन्होंने कहा कि जब तक तीन बार की IPL चैंपियन टीम अहम खिलाड़ियों को अपने पास बनाए रखने की अहमियत नहीं समझेगी तब तक उसे खिताब का गंभीर दावेदार नहीं माना जा सकता। अय्यर केकेआर छोड़कर पंजाब किंग्स में शामिल हो गए जिसकी कप्तानी करते हुए उन्होंने पिछले सत्र में करीब एक दशक बाद टीम को पहली बार आईपीएल फाइनल में पहुंचाया। वहीं 2024 में KKR की सफलता का अहम हिस्सा रहे फिल सॉल्ट रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू (RCB) चले गए जहां उन्होंने पिछले साल फ्रेंचाइजी को पहली बार खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई।

कुंबले ने कहा, ‘दो साल पहले KKR ने IPL जीता था और अपनी तीसरी ट्रॉफी उठाई थी। उस जीत के दो अहम खिलाड़ी श्रेयस अय्यर और फिल सॉल्ट थे। दोनों ने टीम को जिताने में अहम भूमिका निभाई लेकिन केकेआर ने दोनों को जाने दिया।’ उन्होंने कहा, ‘खिलाड़ियों को अपने साथ रखने के मामले में उनमें कोई निरंतरता नहीं है। KKR ने श्रेयस अय्यर और फिल सॉल्ट को जाने देकर गलत फैसला किया और इस वजह से अब उनके पास IPL जीतने वाला कोई कप्तान नहीं है।’ कुंबले ने कहा कि भले ही KKR के पास कप्तान के तौर पर अजिंक्य रहाणे जैसा अनुभवी खिलाड़ी है लेकिन उन्होंने अभी तक कप्तान के तौर पर IPL का खिताब नहीं जीता है। कुंबले ने कहा, ‘अजिंक्य रहाणे एक अनुभवी खिलाड़ी हैं।

उन्होंने घरेलू क्रिकेट में मुंबई और IPL में राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी की है। लेकिन उन्होंने अभी तक कप्तान के तौर पर IPL का खिताब नहीं जीता है।’ इस दिग्गज स्पिनर ने आगे कहा, ‘ऐसा कप्तान होना जिसने ट्रॉफी जीती हो, आपको फायदा देता है। उन्हें यह सीखना होगा कि अपने अहम खिलाड़ियों को अपने पास कैसे बनाए रखा जाए। वर्ना वे संघर्ष करते रहेंगे और उन्हें ट्रॉफी जीतने का दावेदार नहीं माना जा सकता।’ भारत के पूर्व कप्तान ने पिछले साल पंजाब किंग्स को IPL फाइनल तक पहुंचाने के लिए अय्यर के नेतृत्व क्षमता की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘श्रेयस अय्यर निश्चित रूप से कप्तान के तौर पर कम आंके गए हैं।

एक फ्रेंचाइजी के साथ ट्रॉफी जीतना और फिर दूसरी फ्रेंचाइजी में जाना आसान नहीं होता। वहां का प्रबंधन, माहौल और टीम सब अलग होते हैं। वहां का दबाव भी अलग होता है।’ कुंबले ने कहा, ‘जिस नयी फ्रेंचाइजी में वह शामिल हुआ था, उसने पिछले 10 साल में फाइनल नहीं खेला था और पंजाब किंग्स के साथ अपने पहले ही सत्र में उसने उन्हें फाइनल तक पहुंचा दिया। मैं न सिर्फ उसकी कप्तानी से प्रभावित हुआ, बल्कि जिस तरह से उसने टीम का नेतृत्व किया, उससे भी प्रभावित हुआ।’ उन्होंने कहा, ‘कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जिन्हें हर बार खुद को साबित करना पड़ता है। श्रेयस भी वैसा ही है। अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी, उस पर सवाल उठते रहते हैं। मुझे लगता है कि उसे कम आंका जाता है, लेकिन वह एक असाधारण नेतृत्वकर्ता है।’

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