

नयी दिल्ली : भारत की T-20 विश्व कप खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाने वाले संजू सैमसन ने रविवार को कहा कि देश आने वाले कई वर्षों तक वैश्विक क्रिकेट पर राज करने के लिए तैयार है। यहां BCCI नमन पुरस्कार 2026 के मौके पर सैमसन ने भारत की जीत के सफर के दौरान अपने प्रदर्शन की तुलना एक फिल्म से की और कहा कि उन्हें अब भी इस पर यकीन नहीं हो रहा है। पिछले रविवार की जीत के बारे में पूछे जाने पर सैमसन ने कहा, ‘अब भी जब मैं सुबह उठता हूं तो सोचता हूं कि ‘क्या सच में ऐसा हुआ है?’ ईमानदारी से कहूं तो यही अहसास है।’
उन्होंने कहा, ‘लेकिन मुझे लगता है कि हमारे देश में जिस तरह के बेहतरीन खिलाड़ी हैं उसे देखते हुए आने वाले वर्षों में यह जीत बार-बार दोहराई जाएगी। जिस बड़ी संख्या में नए खिलाड़ी सामने आ रहे हैं उसे देखते हुए भारत निश्चित रूप से अब ऐसा बार-बार करेगा।’ T-20 विश्व कप 2026 में ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद सैमसन को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया था। उन्होंने सिर्फ पांच पारियों में लगभग 200 के स्ट्राइक रेट से 321 रन बनाकर भारत को खिताब दिलाया। शुरुआत में टीम में जगह नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर आठ चरण के अहम मैच में, इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में, और न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में 80 से अधिक रन बनाकर शानदार प्रदर्शन किया।
सैमसन ने कहा कि वह भारत को विश्व कप जिताने का सपना देख रहे थे। उन्होंने कहा, ‘बिल्कुल, मुझे लगता है कि आप वही सपना देखते हैं जहां आप जाना चाहते हैं लेकिन यह तय नहीं है कि आप उस रास्ते पर चल पाएं। इसलिए मेरी जिंदगी या मेरा करियर इसका सबसे अच्छा उदाहरण रहा है। मैं निश्चित रूप से कुछ साल पहले ऐसा करना चाहता था।’ सैमसन ने कहा, ‘मैं अपने देश के लिए विश्व कप जीतना चाहता था लेकिन इसकी अपनी ही एक योजना थी, अपनी ही एक कहानी थी। तो यह कुछ-कुछ एक फिल्म जैसा था। मुझे इसमें मजा आया।’ केरल के इस सीधे-सादे स्टार ने खेल पर अपनी छाप छोड़ने के लिए वर्षों तक कड़ी मेहनत की है और T-20 विश्व कप उनके करियर का सबसे बेहतरीन पल था।
सैमसन ने कहा, ‘जैसा कि मैंने पहले कहा कि मैं कुछ ऐसा करना चाहता था, फिर मुझे मेरी यात्रा से हटा दिया गया और फिर अचानक टीम चाहती थी कि मैं आकर योगदान दूं और तभी मेरा मानसिक नजरिया थोड़ा बदल गया। मुझे लगता है कि उससे पहले न्यूजीलैंड सीरीज में मेरा पूरा ध्यान सिर्फ अपने ऊपर था।’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन विश्व कप में पूरा ध्यान टीम पर था। मैं सोचता था कि टीम को किस चीज की जरूरत है और जिम्बाब्वे के मैच में, ठीक उसी पल से हर कोई चाहता था कि मैं टीम में योगदान दूं। मुझे अपनी भूमिका निभानी थी।
तभी यह बदलाव आया और यह आत्मविश्वास जागा कि ठीक है ‘टीम को तुम्हारी जरूरत है, संजू’ और चलो वह करते हैं जो तुम सबसे अच्छा कर सकते हो। तो यहीं से सब कुछ शुरू हुआ।’ तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज ने इस जीत को एक ‘चमत्कार’ बताया क्योंकि वह टूर्नामेंट के लिए शुरुआती टीम का हिस्सा भी नहीं थे और उन्हें चोटिल हर्षित राणा की जगह टीम में शामिल किया गया था। उन्होंने कहा, ‘मैं शुरुआती टीम में नहीं था और फिर मुझे मौका मिला, मैंने एक मैच खेला और अब मैं विश्व कप जीतने वाली दो टीम का हिस्सा बन चुका हूं। मैं तो कहूंगा कि यह मेरे लिए एक चमत्कार है।’