ईंधन कीमतों में उछाल से 38 माह के उच्च स्तर पर पहुंच गई थोक महंगाई

ऊर्जा की बढ़ती कीमतें अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी असर डालेंगी
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थोक महंगाई
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नयी दिल्ली : पश्चिम एशिया संकट के बीच ईंधन, बिजली एवं विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण मार्च में थोक मुद्रास्फीति तीन साल से अधिक यानी 38 माह के उच्च स्तर 3.88 प्रतिशत पर पहुंच गई। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति मार्च में लगातार पांचवें महीने बढ़ी।

वृद्धि के आसार : प्राथमिक खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी के बीच मुख्य मुद्रास्फीति में तेजी आई। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें अंततः अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी असर डालेंगी, इसलिए आने वाले महीनों में थोक मुद्रास्फीति में और वृद्धि के आसार हैं। थोक मुद्रास्फीति मार्च में वैश्विक जिंस कीमतों में वृद्धि और 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष की शुरुआत के बाद से ऊर्जा कीमतों में आए झटके के प्रभाव को दर्शाती है। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति फरवरी में 2.13 प्रतिशत और मार्च, 2025 में 2.25 प्रतिशत थी। वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी बार्कलेज ने कहा, वैश्विक ऊर्जा कीमतों के ऊंच स्तर पर बने रहने से धीरे-धीरे अन्य जिंस कीमतों पर असर पड़ता है। हमारा अनुमान है कि भविष्य में थोक महंगाई और बढ़ेगी।

मुख्य वजह : कच्चे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, अन्य विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुएं, ‘मूल धातु’, विनिर्माण और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि इसकी मुख्य वजह रही। डब्ल्यूपीआई आंकड़ों के अनुसार, ईंधन व बिजली श्रेणी में मुद्रास्फीति मार्च में बढ़कर 1.05 प्रतिशत हो गई जबकि फरवरी में इसमें 3.78 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। कच्चे पेट्रोलियम में मुद्रास्फीति मार्च में बढ़कर 51.57 प्रतिशत हो गई जबकि पिछले महीने इसमें 1.29 प्रतिशत की गिरावट थी। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर भी फरवरी के 2.92 प्रतिशत से बढ़कर मार्च में 3.39 प्रतिशत हो गई।

खाद्य वस्तुओं की महंगाई घटी : खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर हालांकि मार्च में घटकर 1.90 प्रतिशत रह गई जो फरवरी में 2.19 प्रतिशत थी। सब्जियों में यह घटकर 1.45 प्रतिशत हो गई जबकि फरवरी में यह 4.73 प्रतिशत थी।

खुदरा महंगाई : इससे पहले जारी आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई मार्च में बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई जो पिछले महीने 3.21 प्रतिशत थी।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस महीने की शुरुआत में चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अपनी पहली द्वैमासिक मौद्रिक नीति पेश करते हुए प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा था।आरबीआई नीतिगत दरों के निर्धारण के लिए मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को आधार मानता है।

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