

नई दिल्ली : राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने मंगलवार को एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा को अपनी संपत्तियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बेचने या हस्तांतरित करने से रोक दिया। पीठ ने उनके व्यक्तिगत दिवाला मामले में सभी संबंधित पक्षों को नोटिस भी जारी किए हैं। मामला कर्जदाताओं को करीब 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान वाली पुनर्भुगतान योजना से जुड़ा है, जबकि स्वीकृत दावों की राशि करीब 22,006 करोड़ रुपये है।
एनसीएलटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामले में बहुमत की स्पष्ट राय नहीं बन पाई है, इसलिए पहले दिए गए आदेश को फिलहाल प्रभावी नहीं किया जा सकता। पीठ ने स्पष्ट किया कि चंद्रा, व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर, अपनी संपत्तियों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हस्तांतरण नहीं कर सकते।
पीठ ने कहा कि वह मामले के दायरे और सभी पक्षों की दलीलों को विस्तार से समझना चाहती है। इसमें पुनर्भुगतान योजना का विरोध करने वाले कर्जदाता भी शामिल हैं।
इस बीच, असहमत कर्जदाताओं ने पुनर्भुगतान योजना को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में चुनौती दी है। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, केनरा बैंक और यूनियन बैंक समेत अन्य कर्जदाताओं की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एनसीएलएटी से मामले की अगली सुनवाई बुधवार को करने का अनुरोध किया। अपीलीय न्यायाधिकरण ने उनका अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले को बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया है।
चंद्रा का दावा - व्यक्तिगत गारंटी की राशि करीब 3990 रुपये
विवादित योजना में चंद्रा की निजी संपत्ति से कर्जदाताओं को महज 6.5 करोड़ रुपये मिलने का प्रस्ताव है, जो करीब 99.9 प्रतिशत की कटौती के बराबर है। हालांकि, चंद्रा का कहना है कि 22,006 करोड़ रुपये का आंकड़ा उनके व्यक्तिगत कर्ज का नहीं, बल्कि समूह की कंपनियों के कर्ज के लिए दी गई उनकी व्यक्तिगत गारंटियों से जुड़े दावों का है। उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी से संबंधित दावों की राशि करीब 3,990 करोड़ रुपये बताई है।
मामले में एनसीएलटी की मूल दो सदस्यीय पीठ के अशोक कुमार भारद्वाज और रीना सिन्हा पुरी ने अलग-अलग राय दी थी। इसके बाद मामला तीसरे सदस्य निलेश शर्मा के पास भेजा गया। शर्मा ने 25 अगस्त को योजना के पक्ष में फैसला दिया था, जिसे असहमत कर्जदाताओं ने एनसीएलएटी में चुनौती दी। मंगलवार को पांच सदस्यीय पीठ ने उस आदेश को फिलहाल स्थगित कर दिया।