Trading Account में UPI से पैसे डालना पड़ेगा महंगा? SEBI ने Brokers की चिंता पर जांच की बात कही

15 अक्टूबर से Capital Market transactions पर 0.02% MDR, ₹300 तक की सीमा; Brokers बोले- Trade न होने पर भी उठाना पड़ सकता है खर्च
Trading Account में UPI से पैसे डालना पड़ेगा महंगा? SEBI ने Brokers की चिंता पर जांच की बात कही
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अगर आप UPI के जरिए अपने Trading Account में बड़ी रकम डालते हैं, तो आने वाले समय में इस प्रक्रिया से जुड़े खर्च को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। नए UPI Merchant Discount Rate यानी MDR framework को लेकर Stockbrokers ने SEBI के सामने चिंता जताई है। उनका कहना है कि ग्राहक Trading Account में पैसे तो डालता है, लेकिन जरूरी नहीं कि उस रकम से तुरंत कोई Trade भी हो। ऐसे में transaction value के आधार पर लगने वाला MDR Broker के लिए अतिरिक्त लागत बन सकता है। SEBI Chairman Tuhin Kanta Pandey ने कहा है कि regulator इन concerns को देखेगा और यह समझने की कोशिश करेगा कि इन्हें किस तरह कम किया जा सकता है।

15 अक्टूबर से क्या बदल रहा है?

नए framework के तहत Capital Market से जुड़े UPI transactions पर 0.02 फीसदी MDR तय किया गया है। इसमें Stockbrokers, Mutual Funds, Investment Advisers और Dealers से जुड़े भुगतान शामिल हैं। इस category में MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति transaction रखी गई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी।

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। यह MDR सीधे ग्राहक से वसूला जाने वाला UPI charge नहीं है। सरकार के मुताबिक MDR payment ecosystem में शामिल संस्थाओं के बीच बांटा जाता है और ग्राहकों से इसे अलग से वसूलने की अनुमति नहीं है।

फिर Brokers को परेशानी किस बात की है?

Brokers की मुख्य चिंता इस बात को लेकर है कि Trading Account में आने वाला हर पैसा किसी Trade में इस्तेमाल नहीं होता। कोई ग्राहक पैसे जमा करके कुछ समय बाद Trade कर सकता है, या बिना Trade किए रकम वापस अपने बैंक Account में ले सकता है।

यही वजह है कि Brokers का कहना है कि अगर MDR रकम के transfer पर लगेगा, तो उन्हें ऐसे transactions पर भी खर्च उठाना पड़ सकता है जिनसे उन्हें कोई अतिरिक्त revenue नहीं मिलता। Broker associations ने इस मुद्दे को SEBI के सामने उठाया है और framework में बदलाव या अलग व्यवस्था की मांग की है।

Quarterly Settlement से क्यों बढ़ सकती है दिक्कत?

इस पूरे मामले में SEBI के client-fund settlement नियम भी महत्वपूर्ण हैं। Brokers को ग्राहकों के unused funds समय-समय पर वापस करने होते हैं। इसके बाद अगर वही पैसा ग्राहक दोबारा अपने Trading Account में UPI के जरिए डालता है, तो एक ही रकम के बार-बार transfer पर MDR का खर्च पैदा हो सकता है।

Brokers का कहना है कि इस तरह के fund movements का Trade होना जरूरी नहीं है। इसलिए percentage-based charge उनके लिए ऐसा operational cost बन सकता है जिसका सीधा संबंध उनकी कमाई से नहीं होगा।

Brokers चाहते हैं Flat Fee

इसी वजह से Broking industry percentage-based MDR के बजाय Flat Fee की मांग कर रही है। उनका तर्क है कि बड़ी रकम के transfer पर percentage के हिसाब से charge बढ़ने से लागत काफी ज्यादा हो सकती है, जबकि Broker को उस transaction से कोई अतिरिक्त income न मिले।

कुछ Brokers ने यह भी बताया है कि Net Banking जैसे विकल्पों में पहले से Flat Fee structure मौजूद है। ऐसे में UPI के लिए भी एक तय शुल्क उनके लिए ज्यादा अनुमानित और manageable हो सकता है।

क्या इसका सीधा असर Investors पर पड़ेगा?

फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि 15 अक्टूबर से Investors को हर बार Trading Account में पैसे डालने पर अलग से UPI charge देना पड़ेगा। मौजूदा framework के अनुसार MDR regulated entities जैसे Brokers और अन्य संबंधित संस्थाओं पर लागू होता है और इसे ग्राहकों पर सीधे डालने की अनुमति नहीं है।

हालांकि, Brokers का कहना है कि अगर यह खर्च लगातार बढ़ता है तो उनके business model पर दबाव आ सकता है। Industry ने यह सवाल भी उठाया है कि लंबे समय में ऐसे operational costs को किस तरह manage किया जाएगा।

यही वह मुद्दा है जिस पर अब SEBI की नजर है। Regulator ने Brokers और Asset Management Companies की चिंताओं की समीक्षा करने की बात कही है। इसलिए 15 अक्टूबर से पहले यह देखना अहम होगा कि framework में कोई बदलाव होता है या Brokers के लिए fund transfers को लेकर अलग व्यवस्था तैयार की जाती है।

UPI Users के लिए क्या समझना जरूरी है?

नए MDR framework का मतलब यह नहीं है कि हर UPI payment पर charge लगने वाला है। Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI transactions अभी भी free रहेंगे। ₹2,000 तक के सामान्य Merchant Payments भी MDR से बाहर हैं। Capital Market transactions के लिए अलग 0.02 फीसदी की दर तय की गई है।

इसलिए Trading Account में UPI से पैसे डालने वाले Investors के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR सीधे उनके UPI payment पर लगने वाला सामान्य charge नहीं है, लेकिन Brokers की लागत और उससे जुड़े नियमों में बदलाव आने वाले महीनों में उनके trading experience को प्रभावित कर सकते हैं।

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