

नयी दिल्ली : कोयला गैसीकरण से उत्पादित 20 प्रतिशत डाइमिथाइल ईथर (डीएमई) को रसोई गैस (एलपीजी) के साथ मिलाने से एलपीजी आयात में सालाना लगभग 63 लाख टन की कमी आ सकती है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार इससे प्रति वर्ष लगभग 34,200 करोड़ रुपये तक की विदेशी मुद्रा की बचत होगी। पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के बाद से भारत को एलपीजी आपूर्ति में आने वाली बाधाओं के मद्देनजर यह रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
स्वच्छ ईंधन : कोयला गैसीकरण की प्रक्रिया में कोयले को सिनगैस में बदला जाता है, जिसे बाद में डीएमई में बदल दिया जाता है। डीएमई एक स्वच्छ जलने वाला ईंधन है, जो आयातित एलपीजी के स्वदेशी विकल्प के रूप में इस्तेमाल होता है। ईवाई-पार्थेनन और घरेलू कोयला गैसीकरण कंपनी न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशन लिमिटेड की 'ऊर्जा और रासायनिक सुरक्षा के लिए कोयला गैसीकरण' शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, कोयला गैसीकरण से उत्पादित डीएमई, एलपीजी आयात को आंशिक रूप से प्रतिस्थापित कर सकता है। 20 प्रतिशत मिश्रण से सालाना लगभग 63 लाख टन एलपीजी आयात कम हो सकता है।
डीएमई उत्पादन : भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) पहले ही भारत में 20 प्रतिशत तक डीएमई-एलपीजी मिश्रण की अनुमति देने वाले मानकों को अधिसूचित कर चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, डीएमई स्वच्छ ईंधन के एक विकल्प के रूप में उभर रहा है। इस समय भारत में पायलट स्तर पर ही डीएमई उत्पादन किया जा रहा है। न्यू एरा क्लीनटेक के प्रबंध निदेशक बालासाहेब दराडे ने कहा,निवेश को आकर्षित करने और घरेलू डीएमई उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट मिश्रण नीति महत्वपूर्ण होगी।