

नई दिल्ली : घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और त्योहारी सीजन से पहले कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने स्टॉक रखने की सीमा बढ़ाकर 30 दिन कर दी है। हालांकि, निर्धारित सीमा से अधिक चीनी का भंडारण करने की अनुमति केवल आयातित चीनी के मामले में होगी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अगले पेराई सत्र में देश में चीनी उत्पादन घटने की आशंका है।
भारत में अगला गन्ना पेराई सत्र अक्टूबर से शुरू होने वाला है। अल नीनो के कारण कम बारिश और शुष्क मौसम की आशंका से फसल पर असर पड़ने की चिंता है। सरकार घरेलू आपूर्ति मजबूत करने के लिए पहले ही कई कदम उठा चुकी है। इनमें 10 लाख टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति और थोक उपभोक्ताओं व डीलरों के लिए स्टॉक रखने के नियमों को कड़ा करना शामिल है।
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा कि घरेलू कीमतों में गिरावट के बावजूद चीनी का आयात अभी भी व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य है। उनके मुताबिक, सरकार द्वारा मंजूर 10 लाख टन में से करीब 8 लाख टन आयात के लिए चीनी मिलें आवेदन कर चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि घरेलू एक्स-मिल चीनी की कीमतें दो सप्ताह पहले के 65-67 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर करीब 43-44 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई हैं। इस गिरावट का असर खुदरा कीमतों में दिखने में एक से दो सप्ताह लग सकते हैं।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है। सरकार ने 2025-26 विपणन वर्ष के लिए उत्पादन अनुमान 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया है। वहीं, देश में सालाना चीनी की मांग करीब 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है।