

मुंबई/नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों में शामिल SBI Funds Management के शेयरों ने मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत की। हालांकि, शेयर की लिस्टिंग ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) के अनुमान से नीचे रही। कंपनी के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) को मिले जबरदस्त सब्सक्रिप्शन के बाद निवेशकों की नजरें इसकी लिस्टिंग पर थीं।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शेयर 613.30 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ, जो 574 रुपये के इश्यू प्राइस से 6.85 प्रतिशत अधिक है। वहीं बीएसई पर इसकी शुरुआत 610 रुपये पर हुई, यानी निवेशकों को 6.27 प्रतिशत का लिस्टिंग गेन मिला। कारोबार के दौरान शेयर बीएसई पर 624.80 रुपये तक पहुंच गया, जो इश्यू प्राइस से करीब 8.85 प्रतिशत अधिक है। बाद में कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये रहा।
लिस्टिंग से पहले SBI Funds Management का ग्रे मार्केट प्रीमियम करीब 95.5 रुपये था। इस आधार पर शेयर के लगभग 669.5 रुपये पर सूचीबद्ध होने की उम्मीद थी, जो इश्यू प्राइस से करीब 16.64 प्रतिशत का प्रीमियम होता। हालांकि, वास्तविक लिस्टिंग इससे काफी नीचे रही। यह अंतर बताता है कि ग्रे मार्केट के संकेत हमेशा शेयर बाजार में वास्तविक प्रदर्शन की गारंटी नहीं देते।
SBI Funds Management का करीब 9,812.91 करोड़ रुपये का IPO 14 से 16 जुलाई तक बोली के लिए खुला था। इसे कुल 41.66 गुना अभिदान मिला। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के हिस्से को 140.11 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों (NII) के हिस्से को 22.51 गुना और खुदरा निवेशकों के हिस्से को 3.60 गुना अभिदान मिला। कर्मचारियों के लिए आरक्षित हिस्सा 4.65 गुना और शेयरधारकों का हिस्सा 9.52 गुना सब्सक्राइब हुआ।
IPO का प्रबंधन कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी ने किया, जबकि केफिन टेक्नोलॉजीज रजिस्ट्रार थी।
यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) था। इसके तहत भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और अमुंडी इंडिया होल्डिंग ने अपने शेयर बेचे। इसलिए IPO से जुटाई गई रकम कंपनी के पास नहीं गई, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को मिली। इस इश्यू में कुल करीब 17.09 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री की गई।
SBI के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि बैंक की SBI Funds Management में अपनी हिस्सेदारी घटाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि कंपनी को सूचीबद्ध कराने का उद्देश्य खुदरा निवेशकों को परिसंपत्ति प्रबंधन कारोबार में भागीदारी का अवसर देना था।
शेट्टी के अनुसार, SBI ने SBI Funds Management में करीब 6,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। उन्होंने कहा कि बैंक का समर्थन कंपनी की वृद्धि और निवेशकों के भरोसे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण रहा है। उनके मुताबिक, SBI और अमुंडी की साझेदारी ने कंपनी में मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस मानकों को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
1987 में स्थापित SBI Funds Management, SBI और अमुंडी का संयुक्त उद्यम है और SBI Mutual Fund का प्रबंधन करती है। कंपनी इक्विटी, डेट, हाइब्रिड फंड, ETF और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज जैसे निवेश उत्पाद उपलब्ध कराती है। 31 मार्च 2026 तक तिमाही औसत प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (QAAUM) के आधार पर कंपनी देश की सबसे बड़ी परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों में शामिल थी। उसके म्यूचुअल फंड कारोबार की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां करीब 12.51 लाख करोड़ रुपये और बाजार हिस्सेदारी लगभग 15.3 प्रतिशत थी। 2025 के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का कुल AUM करीब 16.32 लाख करोड़ रुपये था और दिसंबर 2025 तक उसके व्यक्तिगत तथा संस्थागत ग्राहकों की संख्या लगभग 1.60 करोड़ थी।
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान उसका शुद्ध मुनाफा 21 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर 3,067.38 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में कुल आय करीब 20 प्रतिशत CAGR से बढ़कर 4,976.11 करोड़ रुपये पहुंच गई। मार्च 2026 के अंत में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में 326.73 करोड़ रुपये थे।
आगे की रणनीति के तहत SBI Funds Management छोटे शहरों और कस्बों में अपनी पहुंच बढ़ाने की तैयारी कर रही है। सीएस शेट्टी ने कहा कि कंपनी B30 शहरों में विस्तार, वितरण नेटवर्क को मजबूत करने और निवेशकों को बेहतर सेवाएं देने के लिए तकनीक में निवेश जारी रखेगी।
उन्होंने कहा कि कंपनी के लिए फंड्स का प्रदर्शन सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही SBI Funds ब्रांड की विश्वसनीयता का आधार है।
कुल मिलाकर, SBI Funds Management की लिस्टिंग ने निवेशकों को तत्काल 6-7 प्रतिशत का लाभ दिया, लेकिन GMP के ऊंचे अनुमानों की तुलना में शुरुआत अपेक्षाकृत संयमित रही। मजबूत ब्रांड, विशाल AUM, व्यापक वितरण नेटवर्क और लगातार बढ़ते मुनाफे के बावजूद, आगे शेयर का प्रदर्शन कंपनी की आय वृद्धि, परिसंपत्ति प्रबंधन उद्योग की प्रतिस्पर्धा और बाजार के मूल्यांकन पर निर्भर करेगा।