

नई दिल्ली : IIT मद्रास से जुड़े स्टार्टअप द ईप्लेन कंपनी (The ePlane Company) ने भारत का पहला इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) विमान प्रोटोटाइप पेश किया है। कंपनी की योजना 2028 तक इसकी व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की है। शुरुआती चरण में इसका इस्तेमाल एयर एंबुलेंस के रूप में होगा, जबकि बाद में इसे शहरी यात्री परिवहन यानी एयर टैक्सी के तौर पर भी उतारा जाएगा।
eVTOL (Electric Vertical Take-Off and Landing) एक बैटरी से चलने वाला विमान है, जो हेलीकॉप्टर की तरह बिना रनवे के सीधे उड़ान भर सकता है और उतर सकता है। उड़ान भरने के बाद यह सामान्य विमान की तरह आगे बढ़ता है। इसमें एक बड़े रोटर की बजाय कई छोटे इलेक्ट्रिक प्रोपेलर लगाए जाते हैं, जिससे कम जगह से भी उड़ान संभव होती है
हालांकि हेलीकॉप्टर और eVTOL दोनों ही सीधे उड़ान भरने और उतरने में सक्षम हैं, लेकिन दोनों की तकनीक अलग है।
हेलीकॉप्टर विमानन ईंधन और बड़े रोटर पर निर्भर होते हैं।
eVTOL बैटरी से चलने वाली कई इलेक्ट्रिक मोटरों और प्रोपेलरों का उपयोग करता है।
कई मोटर होने से सुरक्षा भी बढ़ती है। यदि एक मोटर काम करना बंद कर दे, तो बाकी मोटर विमान को सुरक्षित उतारने में मदद कर सकती हैं।
इसके अलावा eVTOL अपेक्षाकृत कम शोर करता है और रखरखाव की लागत भी कम रहने की उम्मीद है।
द ईप्लेन कंपनी का विमान छोटी दूरी की यात्राओं के लिए तैयार किया जा रहा है। इसका पहला उपयोग आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं (एयर एंबुलेंस) में होगा। इसके बाद एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और शहरों के भीतर यात्री परिवहन के लिए इसे इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य सड़क जाम से बचाकर यात्रा का समय काफी कम करना है।
अधिकांश eVTOL कंपनियां शुरुआत यात्री सेवाओं से नहीं कर रहीं। इसकी वजह यह है कि एयर एंबुलेंस सेवाओं में निश्चित मार्ग, अस्पताल जैसे तय स्थान और तेज परिवहन की अधिक जरूरत होती है। इससे संचालन आसान रहता है और सेवा व्यावसायिक रूप से भी अधिक व्यवहार्य मानी जाती है।
इसी साल इंटरनेशनल क्रिटिकल एयर ट्रांसफर टीम (ICATT) ने द ईप्लेन कंपनी से 788 eVTOL एयर एंबुलेंस खरीदने का समझौता किया है।
eVTOL तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन आम लोगों के लिए एयर टैक्सी सेवा शुरू होने से पहले कई चुनौतियां बाकी हैं।
प्रमाणन : विमान को सुरक्षा और उड़ान संबंधी सभी मंजूरियां हासिल करनी होंगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर : शहरों में विशेष वर्टीपोर्ट बनाने होंगे, जहां विमान उड़ान भर सके, उतर सके, चार्ज हो सके और रखरखाव किया जा सके।
बैटरी क्षमता : मौजूदा बैटरियां भारी हैं, जिससे विमान की दूरी और यात्रियों की संख्या सीमित रहती है।
नियम : पायलट लाइसेंस, एयर ट्रैफिक प्रबंधन और संचालन के लिए नए नियम तैयार करने होंगे।
भारत ने इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत देर से कदम रखा है, लेकिन अब तेजी से अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। द ईप्लेन कंपनी और सरला एविएशन जैसे स्टार्टअप स्वदेशी eVTOL तकनीक पर काम कर रहे हैं।
वहीं वैश्विक स्तर पर जॉबी एविएशन (अमेरिका), आर्चर एविएशन, ईहैंग (चीन), वोलोकॉप्टर, लिलियम और एयरबस जैसी कंपनियां उड़ान परीक्षण और प्रमाणन के मामले में आगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तकनीकी और नियामकीय चुनौतियां समय पर दूर हो गईं, तो आने वाले कुछ वर्षों में eVTOL शहरी परिवहन और आपातकालीन सेवाओं का अहम हिस्सा बन सकता है।