

मुंबई : भारतीय रुपया वित्त वर्ष 2025-26 में डॉलर के मुकाबले 9.88 प्रतिशत कमजोर हुआ है, जो 14 साल में डॉलर के मुकाबले सबसे बड़ी गिरावट है। वित्त वर्ष 2011-12 में, घरेलू मुद्रा, डॉलर के मुकाबले 12.4 प्रतिशत कमजोर हुई थी, उस समय चालू खाते का घाटा बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गया था।
क्या रहा कारण : मौजूदा वित्त वर्ष में, यह भारी गिरावट लगातार विदेशी कोषों की निकासी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक स्तर पर डॉलर के मजबूत होने की वजह से हुई। वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और नकदी की तंगी ने भी 2025-26 में रुपये पर और दबाव डाला। एक अप्रैल से अब तक दूसरी एशियाई मुद्राओं में भी डॉलर के मुकाबले भारी गिरावट देखी गई है। जापानी येन छह प्रतिशत, फिलिपीन की मुद्रा पीसो 5.74 प्रतिशत और दक्षिण कोरियाई वॉन 2.88 प्रतिशत कमजोर हुआ है। दक्षिण कोरियाई बैंक शिन्हान बैंक के भारत में ट्रेजरी प्रमुख, सुनल सोधानी ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 बाहरी झटकों, पूंजी के बाहर जाने और ढांचागत कमजोरियों जैसी कई समस्याओं के एक साथ आने की वजह से रुपया कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि 2025-26 में असर डालने वाले कारक 2011-12 के कारकों से अलग हैं।
संघर्ष ने स्थिति को और खराब कर दिया : वित्त वर्ष 2025-26 में मुद्रा की शुरुआती गिरावट तब शुरू हुई जब अमेरिका ने भारत पर शुल्क लगाए, जिससे डॉलर की मांग में भारी उछाल आया। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने स्थिति को और खराब कर दिया, जिससे कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गईं और रुपये पर दबाव और तेज़ हो गया।