

मुंबई : अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने मंगलवार को कहा कि भारत और अमेरिका को सच्चे साझेदार के रूप में मतभेदों को दूर करते हुए ऐसी विश्वसनीय कर और नियामकीय व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिससे दोनों देशों के कारोबार और निवेश का विस्तार हो सके। उन्होंने निर्यात नियंत्रण पर स्पष्ट एवं विश्वास आधारित संवाद और बौद्धिक संपदा अधिकारों के मजबूत संरक्षण की जरूरत पर भी जोर दिया।
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में अपार संभावनाएं हैं। सम्मेलन का विषय ‘भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना’ था।
गोर ने बताया कि भारत में अमेरिकी दूतावास ने 20 अरब डॉलर से अधिक के निवेश आकर्षित किए हैं, जो दुनियाभर में अमेरिकी दूतावासों के बीच सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि जब भारतीय कंपनियां अमेरिका में निवेश करती हैं, तो उन्हें दुनिया के प्रमुख बाजारों में पहुंच मिलती है और इससे दोनों देशों को लाभ होता है।
उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार दो दशक से कुछ अधिक समय में करीब 20 अरब डॉलर से बढ़कर 240 अरब डॉलर हो गया है। दोनों देश 2030 तक इसे 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षा रखते हैं।
अमेरिकी राजदूत ने बौद्धिक संपदा संरक्षण को निवेश के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कंपनियां भारत में कारोबार की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाती हैं और उनका जवाब भरोसे पर आधारित होता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत पर भरोसा करता है।
गोर के अनुसार, दोनों देशों के साथ मिलकर काम करने से मूल्य श्रृंखलाओं के एकीकरण, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में प्रगति और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि मजबूत आर्थिक साझेदारी दोनों देशों की साझा क्षमता को नई ऊंचाई दे सकती है।