न्यूनतम ईपीएफ पेंशन बढ़ाकर सम्मानजनक करने की जरूरत : संसदीय समिति

1,000 रुपये से गुजर-बसर करना मुश्किल
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नयी दिल्ली : संसद की एक समिति ने ईपीएफओ की कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन 1,000 रुपये की तत्काल और व्यापक समीक्षा की सिफारिश की। समिति ने कहा कि इसे सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाने की जरूरत है। यह सिफारिश ऐसे समय की गयी है जब पेंशनधारक पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि 1,000 रुपये से गुजर-बसर करना मुश्किल है।श्रम, वस्त्र एवं कौशल विकास से जुड़ी संसद की स्थायी समिति ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ‘अनुदान मांगों (2026-27)’ पर अपनी 15वीं रिपोर्ट में कहा कि महंगाई बढ़ने के बावजूद कर्मचारी पेंशन योजना के तहत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये प्रति माह काफी समय से अपरिवर्तित है।

क्या है कारण : समिति के अनुसार विशेष रूप से महंगाई और बढ़ती स्वास्थ्य देखभाल एवं रहन-सहन की लागत को देखते हुए मौजूदा न्यूनतम पेंशन राशि पेंशनधारकों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी अपर्याप्त है। इसलिए, समिति अनुशंसा करती है कि मंत्रालय कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 के तहत न्यूनतम पेंशन की तत्काल और व्यापक समीक्षा करे, ताकि इसे समय के अनुसार अधिक वास्तविक और सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाया जा सके।

जीवन यापन लागत के अनुरूप उचित न्यूनतम पेंशन : समिति का यह भी सुझाव है कि मंत्रालय योजना के लिए बजटीय सहायता बढ़ाने की संभावना तलाशे, ताकि पेंशनधारकों को वर्तमान जीवन यापन लागत के अनुरूप उचित न्यूनतम पेंशन प्राप्त हो सके और योजना के अंतर्गत आने वाले लाखों सेवानिवृत्त श्रमिकों को अधिक सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता प्रदान की जा सके। श्रम संहिता के कार्यान्वयन की सराहना और स्वागत करते हुए, समिति ने प्राथमिकता के आधार पर केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधियों वाला एक स्थायी समन्वय एवं संवाद बोर्ड के गठन की भी सिफारिश की है।

सामाजिक सुरक्षा : अनुबंध पर काम करने वाले कई श्रमिक नियमित श्रमिकों के समान कार्य करते हैं, लेकिन कार्यस्थल दुर्घटनाओं के बाद राहत और मुआवजा प्राप्त करने में अक्सर देरी का सामना करते हैं। इसको देखते हुए समिति ने सिफारिश की है कि ऐसे श्रमिकों को कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) और कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत समय पर ‘कवरेज’ सुनिश्चित किया जाए। समिति ने केंद्र और राज्य सरकारों से अनुपालन की निगरानी और मुआवजे के शीघ्र वितरण को सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था स्थापित करने को भी कहा है।

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