

पिथौरागढ़ : उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख दर्रे से भारत-तिब्बत सीमा व्यापार आखिरकार 1 अगस्त से फिर शुरू होगा। कई सप्ताह के इंतजार के बाद तिब्बत के पुरांग (तकलाकोट) स्थित व्यापारिक मंडी में भारतीय व्यापारियों को प्रवेश की मंजूरी मिल गई है।
धारचूला के उपजिलाधिकारी एवं व्यापार अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि तिब्बती प्रशासन की ओर से आधिकारिक सूचना मिल चुकी है। इसके अनुसार 1 अगस्त से भारतीय व्यापारी तकलाकोट में प्रवेश कर व्यापार कर सकेंगे।
करीब 28 भारतीय व्यापारी कई दिनों से चीन की मंजूरी का इंतजार कर रहे थे। तिब्बती प्रशासन ने पहले बताया था कि व्यापारियों के लिए दुकानों और ठहरने की व्यवस्था तैयार करने में समय लगने के कारण अनुमति में देरी हुई।
अब व्यापारिक वस्तुओं की सूची भी तिब्बती प्रशासन को भेजी जा रही है, ताकि सीमा व्यापार बिना किसी बाधा के शुरू हो सके।
हालांकि, व्यापारियों ने सत्र देर से शुरू होने पर नाराजगी जताई है। भारत-चीन सीमा व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंगकली ने कहा कि जुलाई का पूरा महीना निकल जाने से कारोबारियों को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा।
उन्होंने कहा कि सीमा व्यापार केवल अक्टूबर तक चलता है और अगस्त के बाद तिब्बती खरीदारों की मांग काफी कम हो जाती है। ऐसे में इस बार करीब 40 प्रतिशत सामान बिना बिके रह जाने की आशंका है।
रोंगकली ने बताया कि व्यापारी इस साल नया माल बेचने के साथ-साथ 2019 से तिब्बत के गोदामों में रखे पुराने स्टॉक को भी निकालना चाहते थे।
इस वर्ष धारचूला व्यापार कार्यालय ने 113 व्यापारियों और उनके 113 सहायकों को सीमा व्यापार के लिए पास जारी किए हैं।
कोरोना महामारी के कारण 2019 में बंद हुआ भारत-तिब्बत सीमा व्यापार अब लिपुलेख दर्रे से दोबारा शुरू हो रहा है। हालांकि, 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह व्यापार बंद हो गया था, जिसे 1992 में दोनों देशों की सहमति से फिर बहाल किया गया था।
यह वस्तु-विनिमय (बार्टर) व्यापार है। भारतीय व्यापारी चीनी-मिश्री, गुड़, कॉस्मेटिक और किराना सामान लेकर तिब्बत जाते हैं, जबकि वहां से ऊन, पश्मीना उत्पाद और जूते जैसे सामान भारत लाते हैं।