

नयी दिल्ली : भारत ने यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से रूस से लगभग 144 अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल आयात किया है। यूरोपीय शोध संस्थान सीईआरए ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीईआरए) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘रूस ने 24 फरवरी, 2022 को यूक्रेन पर हमला शुरू होने के बाद से जीवाश्म ईंधन की वैश्विक बिक्री से जनवरी 2026 तक 1,000 अरब यूरो से अधिक की कमाई की है, और इसका उपयोग यूक्रेन युद्ध में किया जा रहा है। इस अवधि में भारत ने रूस से 162.5 अरब यूरो मूल्य के जीवाश्म ईंधन खरीदे हैं। इनमें 143.88 अरब यूरो मूल्य का तेल और 18.18 अरब यूरो मूल्य का कोयला शामिल है।
चीन की खरीद : इस दौरान चीन के बाद भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा है। चीन ने फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से 210.3 अरब यूरो मूल्य का रूसी तेल, 42.7 अरब यूरो मूल्य का कोयला और 40.6 अरब यूरो मूल्य की गैस खरीदी है। युद्ध की शुरुआत से लेकर तीन जनवरी, 2026 तक चीन की रूस से कुल ऊर्जा खरीद 293.7 अरब यूरो रही है।
यूरोपीय संघ की खरीद : यूरोपीय संघ ने रूस से जीवाश्म ईंधन खरीदने पर 218.1 अरब यूरो खर्च किए। इसमें 106.3 अरब यूरो तेल पर, 3.5 अरब यूरो कोयले पर और 108.2 अरब यूरो गैस पर खर्च किए गए।
रूस के खिलाफ प्रतिबंध : रूस के यूक्रेन पर हमले से नाराज होकर जी-7 समूह (अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जापान, इटली, फ्रांस और जर्मनी) और यूरोपीय संघ ने रूस के खिलाफ प्रतिबंध और निर्यात नियंत्रण लागू कर दिए।हालांकि, ये प्रतिबंध संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के किसी प्रस्ताव के तहत नहीं हैं। चीन, भारत, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), इजराइल और सऊदी अरब सहित कई देश रूस के खिलाफ एकतरफा प्रतिबंधों का समर्थन नहीं करते हैं। नाटो सदस्य देश तुर्की और यूरोपीय संघ में शामिल होने की कोशिश में जुटे सर्बिया ने भी प्रतिबंधों को मानने से इनकार किया है।
रूसी तेल का प्रवाह : रूसी तेल का प्रवाह यूरोपीय संघ में, मुख्य रूप से हंगरी और स्लोवाकिया में जारी है। प्रतिबंध लगाने वाले देश रूसी कच्चे तेल से परिष्कृत उत्पादों को आयात की अनुमति देकर रूस के राजस्व को बढ़ावा देना जारी रखे हुए हैं।
क्या है स्थिति : दिसंबर 2022 में रूसी कच्चे तेल पर और फरवरी 2023 में रूसी परिष्कृत उत्पादों पर प्रतिबंध लगने के बाद से यूरोपीय संघ ने रूस से जीवाश्म ईंधन के आयात में लगातार गिरावट आई है।यूरोपीय संघ के केवल दो देश... हंगरी और स्लोवाकिया... रूसी तेल का आयात जारी रखे हुए हैं। रूसी गैस अभी भी प्रतिबंध के दायरे में नहीं है।