6.6 से 6.8 प्रतिशत रह सकती है भारत की GDP

वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता, कच्चे तेल की नरम कीमतें और घरेलू मांग व निवेश की मजबूती से वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि 6.6-6.8 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान
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नयी दिल्ली : वैश्विक ऊर्जा बाजारों में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बहाल होने और घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद के साथ चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 से 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। 'ईवाई इकॉनमी वॉच' शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें अपेक्षाकृत निचले स्तर पर स्थिर रहती हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य हो जाती है, तो भारत की आर्थिक वृद्धि की सकारात्मक गति फिर से मजबूत हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति 4.5 प्रतिशत, बाजार मूल्य पर GDP वृद्धि 12.5 प्रतिशत, केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा GDP का 4.4 प्रतिशत तथा चालू खाते का घाटा GDP का 1.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। बाहरी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था उल्लेखनीय मजबूती दिखा रही है।

क्या है संभावनाएं : वैश्विक ऊर्जा बाजारों में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बनने से आपूर्ति संबंधी दबाव कम होंगे, लागत की स्थिति बेहतर होगी और वित्त वर्ष 2026-27 में आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिलेगा। जिंसों की कीमतों में नरमी और आपूर्ति की स्थिति में सुधार के कारण मुद्रास्फीति लगभग 4.5 प्रतिशत के स्तर पर नियंत्रित रहने की संभावना है। वैश्विक ऊर्जा कीमतों में कमी और बाहरी परिस्थितियों में सुधार से बाह्य क्षेत्र को भी बल मिलेगा।

क्या है स्थिति : महत्वपूर्ण आंकड़ें (GST संग्रह, बिजली खपत, PMI आदि) अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत दे रहे हैं। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, ऋण वृद्धि स्थिर है, औद्योगिक उत्पादन में सुधार हो रहा है तथा वाहन क्षेत्र की मांग भी मजबूत बनी हुई है। मध्यम अवधि में घरेलू खपत, निवेश और सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन भारत की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख आधार बने रहेंगे। देश का मजबूत पेट्रोलियम परिशोधन परिवेश ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को मजबूती देने और बाहरी जोखिमों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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